Govt Employee Suspension Period: कितने दिन सस्पेंड रह सकता है सरकारी कर्मचारी? निलंबन अवधि को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बताई ये वजह

कितने दिन सस्पेंड रह सकता है सरकारी कर्मचारी? निलंबन अवधि को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, Govt Employee Suspension Period

Govt Employee Suspension Period: कितने दिन सस्पेंड रह सकता है सरकारी कर्मचारी? निलंबन अवधि को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बताई ये वजह
Modified Date: September 19, 2026 / 05:22 pm IST
Published Date: September 19, 2026 5:22 pm IST

रांचीः Govt Employee Suspension Period सरकारी कर्मचारियों के निलंबन अवधि को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत का मानना है कि विभागीय कार्यवाही शुरू किए बिना लंबे समय तक निलंबन जारी रखना उसे दंड के रूप में इस्तेमाल करने जैसा होगा। इसलिए कर्मचारी का निलंबन सामान्य तौर पर तीन महीने से आगे जारी नहीं रखा जा सकता, यदि इस अवधि में उसे चार्जशीट नहीं दी गई है। कोर्ट ने लंबे समय से निलंबित डाक विभाग के कर्मचारी को राहत देते हुए निलंबन समाप्त करने का आदेश दिया।

Govt Employee Suspension Period दरअसल, डाक विभाग का कर्मचारी गिरिडीह प्रधान डाकघर में कोषाध्यक्ष के पद पर कार्यरत था। झारखंड डाक परिमंडल में 26 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में उसे 27 सितंबर 2019 को निलंबित किया गया। निलंबन की समय-समय पर समीक्षा होती रही, लेकिन विभागीय चार्जशीट करीब ढाई साल बाद 7 मार्च 2022 को जारी की गई। इसी को लेकर कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निलंबन का उद्देश्य किसी कर्मचारी को जांच या विभागीय कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए एहतियाती कदम के रूप में होता है। इसे अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब कर्मचारी को चार्जशीट ही नहीं दी गई हो। अदालत ने दोहराया कि यदि तीन महीने के भीतर चार्जशीट नहीं दी जाती है तो निलंबन आदेश सामान्य तौर पर तीन महीने से आगे प्रभावी नहीं रह सकता। यदि चार्जशीट जारी कर दी जाती है तो निलंबन आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन तीन महीने की अवधि समाप्त होने से पहले उसकी समीक्षा आवश्यक होगी। समीक्षा के जरिए निलंबन आगे नहीं बढ़ाया गया तो तीन महीने के बाद वह प्रभावी नहीं रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला

हाईकोर्ट ने अजय कुमार चौधरी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए निलंबन के उद्देश्य को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि निलंबन का उद्देश्य कर्मचारी को जांच या विभागीय कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से रोकना है। इसे चार्जशीट के बिना अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि अगर तीन महीने के भीतर चार्जशीट नहीं दी जाती है तो निलंबन आदेश की अवधि तीन महीने से आगे नहीं बढ़नी चाहिए। अगर चार्जशीट दे दी जाती है तो निलंबन आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन तीन महीने की अवधि खत्म होने से पहले इसकी समीक्षा जरूरी होगी।


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।