चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों को हटा सकती है सरकार : कांग्रेस का दावा

चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों को हटा सकती है सरकार : कांग्रेस का दावा

चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों को हटा सकती है सरकार : कांग्रेस का दावा
Modified Date: January 9, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: January 9, 2026 5:02 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को एक खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि मोदी सरकार अब चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रख रही है, ताकि वे भारतीय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगा सकें।

विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि यह कदम चीनी आक्रामकता के सामने एक ‘‘सोची-समझी आत्मसमर्पण नीति’’ से कम नहीं है।

कांग्रेस ने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान चीन नीति पर अपनी सरकार के अचानक लिए गए इस ‘‘यू-टर्न’’ के बारे में स्पष्टीकरण दें।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं देश नहीं झुकने दूंगा। आज जो हो रहा है, वह बिल्कुल उसका उल्टा है। दो ताजा उदाहरण- पांच साल से लगा चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाया जा रहा है। गलवान में भारतीय वीर सैनिकों ने जो आहुति दी, उनके बलिदान का अपमान तो मोदी जी ने चीन को ‘क्लीन चिट’ थमाकर किया था।’’

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘अब चीनी कंपनियों के लिए ‘‘लाल कार्पेट’’ बिछाकर, वह ये दिखा रहे हैं कि उनकी ‘लाल आंख में चीनी ‘लाल रंग’ कितना गहरा है।’’

कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रोजाना भारत द्वारा रूसी तेल निर्यात पर टिप्पणी कर रहें हैं लेकिन मोदी जी चुप हैं और अपनी ‘‘नजरें चुरा रहे हैं’’।

खरगे ने कहा, ‘‘ ‘सर’ वाली बात ‘सरेंडर’ ज्यादा दिखती है। हमारे लिए विदेश नीति का मतलब, राष्ट्र हित सर्वोपरि होना जरूरी है। लेकिन मोदी सरकार ने हमारी गुटनिरपेक्ष और रणनीतिक स्वायत्तता वाली विदेश नीति को गहरी चोट पहुंचाई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार की विदेश नीति एक ‘वाइल्ड पेंडुलम’ की तरह कभी इधर, कभी उधर झूलती है और इसका खामियाजा भारत की जनता भुगत रही है।’’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि भारत का वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर पांच साल पुराने प्रतिबंधों को समाप्त करने की योजना बना रहा है।

इन दावों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को पूर्ण सैन्य समर्थन (और खुले तौर पर मोर्चा संभालने) देने के आठ महीने बाद और जब सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह चीन को भारत के “दुश्मनों” में से एक बता चुके हैं- अब मोदी सरकार चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रख रही है, ताकि वे भारतीय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगा सकें।’’

उन्होंने कहा कि यह कदम भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चीनी कंपनियों को निवेश की अनुमति देने, चीनी कामगारों को उदारतापूर्वक वीजा प्रदान करने संबंधी पूर्व के निर्णयों के बाद ऐसे समय में उठाया गया है, जब चीन के साथ भारत का रिकॉर्ड व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने दावा किया कि ये फैसले नीति आयोग की उन व्यापक सिफारिशों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य भारत में चीनी व्यापार और निवेश पर लगी सभी पाबंदियों को पूरी तरह हटाना है।

रमेश ने कहा, ‘‘यह कदम चीनी आक्रामकता के सामने एक सोची-समझी आत्मसमर्पण नीति से कम नहीं है, जो प्रधानमंत्री की अपनी कमजोरी से उपजी है-जिसका सबसे शर्मनाक उदाहरण 19 जून 2020 को चीन को सार्वजनिक रूप से दी गई उनकी “क्लीन चिट” है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘यह अपमानजनक झुकाव ऐसे समय हो रहा है, जब भारतीय सैनिकों को पारंपरिक गश्ती क्षेत्रों में पहुंचने से रोका जा रहा है, चीन पूर्वी लद्दाख में भारी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, अरुणाचल प्रदेश के मामले में लगातार उकसा रहा है, और ब्रह्मपुत्र नदी पर मेडोग बांध का निर्माण कर रहा है- यह सब पाकिस्तान के भारत पर हमलों को अति सक्रिय समर्थन देने के एक साल से भी कम समय बाद हो रहा है।’’

रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘‘टालमटोल’’ भरे जवाब बहुत लंबे समय से चलते आ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि अब उन्हें संसद के आगामी बजट सत्र में चीन नीति पर अपनी सरकार के ‘‘यू-टर्न’’ के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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