नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छात्रों को ‘‘माफ करने’’ की बात करते हैं, लेकिन वास्तव में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्रों के प्रति सच्चाई और न्याय के पक्ष में खड़े होते हुए उनसे माफी मांगे।
गांधी ने ये टिप्पणियां इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कीं, जिसमें उन्होंने शनिवार को तमिलनाडु दौरे के दौरान गोपिका, रोशिनी और वेत्री आनंदन के परिवारों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो साझा किया। इन तीनों ने नीट प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा, ‘‘तमिलनाडु की अपनी यात्रा के दौरान, मैंने गोपिका, रोशिनी और वेत्री आनंदन के परिवारों से मुलाकात की। ये तीनों मेडिकल अभ्यर्थी थे, जिनकी जान नीट प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा रद्द होने के कारण चली गई। हर परिवार के सामने एक ही दर्दनाक सवाल रह गया: ईमानदार और मेहनती विद्यार्थियों को एक बेईमान व्यवस्था की कीमत क्यों चुकानी पड़े?’’
गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के कारण परीक्षा रद्द हुई और विद्यार्थियों को दोबारा नीट परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि हर आंकड़े के पीछे एक ऐसा बच्चा है, जिसके सपने थे और एक ऐसा परिवार है जो अब अपूरणीय क्षति के साथ जीवन जी रहा है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैंने उनका दर्द सुना। हमारी लड़ाई ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए है, जहां मेहनत का सम्मान हो, परीक्षाएं निष्पक्ष हों और किसी भी छात्र को संस्थानों की विफलता के कारण इस हद तक परेशान न होना पड़े कि वह टूट जाए।’’
गांधी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री छात्रों को ‘माफ करने’ की बात करते हैं। इन अभिभावकों की पीड़ा सुनने के बाद मेरा विश्वास और भी मजबूत हो गया है: भारत के छात्रों को किसी माफी की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्रों के प्रति सच्चाई और न्याय के पक्ष में खड़े होते हुए उनसे माफी मांगे।’’
वीडियो में गांधी को उन छात्रों के परिवारों के साथ बातचीत करते हुए देखा जा सकता है, जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
गांधी ने कहा, ‘‘माता-पिता को अपने बच्चे के लिए शोक मनाते देखना सबसे अधिक पीड़ादायक होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अपनी जान गंवाने वाले हर युवा के पीछे एक ऐसा परिवार है, जो ऐसा दर्द झेल रहा है, जो कभी उनका साथ नहीं छोड़ेगा और साथ ही एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। प्रश्नपत्र लीक होना। परीक्षाएं रद्द होना। सालों की तैयारी रातों-रात बर्बाद हो जाना। हमारे विद्यार्थियों को एक ऐसी व्यवस्था में ईमानदारी से काम करने के लिए कहा जाता है, जो खुद उनके प्रति ईमानदार नहीं है।’’
गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, ‘‘जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को खो दिया है, उनके आंसू और उनका विलाप-इससे बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता। यह दुख उनके साथ जीवनभर रहेगा-और इसके साथ ही इस टूटी हुई और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी बने रहेंगे।’’
प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाएं रद्द होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री में छात्रों को माफ करने की बात करने का दुस्साहस है।’’
गांधी ने कहा था, ‘‘क्या उन्होंने (मोदी) कभी किसी ऐसे दुखी परिवार से मुलाकात की है, जिसने अपने बच्चे को खो दिया है? या उन लोगों से मिले हैं, जिनकी पूरी जमा-पूंजी, जीवन का समय और सपने प्रश्न पत्र लीक के कारण छीन लिए गए हैं? जवाब है-नहीं! भारत के विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री द्वारा माफ किए जाने की जरूरत नहीं है। मोदी जी को उनसे माफी मांगनी चाहिए।’’
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप