(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र में हजारों छात्र सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि पूरे तंत्र से उनका भरोसा टूट चुका है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को महाराष्ट्र के छात्रों की आवाज सुननी चाहिए, वरना ‘छात्रों की गूंज’ और तेज होगी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, हर छात्र भाजपा शासन से परेशान है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘महाराष्ट्र में हजारों छात्र शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसकी वजह सिर्फ कोई एक परीक्षा या भर्ती नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र से टूटा हुआ भरोसा है।’’
गांधी ने कहा, ‘‘चाहे केंद्र हो या राज्य, भाजपा सरकार में हर छात्र परेशान है। प्रश्नपत्र लीक, रुकी हुई भर्तियां, शिक्षा की बढ़ती और असहनीय लागत, छात्रावासों में अमानवीय हालात, जहर जैसा खाना और डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) में धोखाधड़ी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘….अब एमपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था पर भी नियंत्रण कर उसकी विश्वसनीयता को खत्म कर दिया गया है।’’
गांधी ने जोर देकर कहा कि छात्रों के बेहतर भविष्य से जुड़ी उनकी हर मांग जायज है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए और तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। वरना यह ‘छात्रों की गूंज’ तब तक और तेज होती जाएगी, जब तक न्याय नहीं मिल जाता।’’
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की मौजूदा भर्ती परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, विश्वसनीय और उम्मीदवारों के अनुकूल बनाने के उपाय सुझाना है।
समीक्षा में परीक्षा प्रक्रिया के सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इनमें प्रश्नपत्र तैयार करना और उनकी जांच, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता एवं सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्रों का प्रबंधन और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल, नकल एवं अन्य अनियमितताओं की रोकथाम, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, शिकायतों का निवारण और उम्मीदवारों के समग्र परीक्षा अनुभव की समीक्षा शामिल है।
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने छात्रावासों की बदहाल स्थिति, छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन किए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए परीक्षा सुधार के लिए नयी समिति गठित करने का फैसला किया।
भाषा शोभना सिम्मी
सिम्मी