नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को संकट के समय समुचित राहत नहीं मिलने का दावा करते हुए कहा कि किसानों के दावों का समय पर और उचित भुगतान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए शुक्ला ने कहा कि कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बड़े जोश से योजना शुरू की गई थी और कहा गया था कि किसानों को कम प्रीमियम पर संकट में बड़ी मदद मिलेगी। ‘‘लेकिन आज किसानों को जरूरत के समय इन योजनाओं से कुछ नहीं मिल पा रहा है।’’
शुक्ला ने कहा कि महाराष्ट्र के अकोला में किसानों की फसलें खराब हो गईं और उनके खाते में मुआवजे के तौर पर 25 रुपये, आठ रुपये और कहीं पर तो केवल तीन रुपये आए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बरेली में इस साल जनवरी में बाढ़ में धान की फसल खराब हो गई लेकिन किसानों को नहीं के बराबर मुआवजा मिला।
कांग्रेस सदस्य ने दावा किया कि कृषि मंत्री मध्यप्रदेश से आते हैं और वहां भी यही हाल है।
उन्होंने कहा कि कीटनाशक, बीज, उर्वरक, डीजल, कृषि उपकरणों की कीमत क्या है और किसानों को जो मुआवजा मिलता है, उससे वह क्या-क्या खरीद सकता है? तीन रुपये में तो मोबाइल फोन भी रिचार्ज नहीं होता। ‘‘ऐसे में किसान क्या मुआवजे की रकम को फ्रेम करवा कर यह सोचते हुए रखेगा कि यह मेरा बीमा सुरक्षा कवच है।’’
शुक्ला ने कहा कि कई बार तो खेत का ‘फिजिकल वेरीफिकेशन’ भी नहीं होता। कभी अधिकारी जब तक खेत में मुआयना करते हैं तब तक नुकसान हो चुका होता है, कई बार तो अगली फसल का सीजन आ चुका होता है। उन्होंने कहा कि मुआवजे के लिए बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है। कई बार पोर्टल बंद हो जाता है और सर्वर डाउन रहता है लेकिन समाधान नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि ‘एरिया एप्रोच’ के नाम पर औसत निकाल लिया जाता है और अगर पूरे क्षेत्र का औसत ठीक बता दिया जाए तो जिस किसान की पूरी फसल चौपट हुई, उसे भी कहा जाता है कि उनके इलाके में सब सामान्य है।
निजी बीमा कंपनियों को हजारों रुपये का प्रीमियम मिलता है। लेकिन उन्हें किसानों को मुआवजा देने में बेहद तकलीफ होती है।
उन्होंने मांग की कि फसलों के नुकसान पर किसानों के दावे के निपटान और भुगतान की प्रक्रिया तेज और आसान की जाए ताकि किसानों को राहत मिले। उन्होंने यह भी मांग की कि मौका मुआयना की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश