सरकार ने छात्रों पर बल प्रयोग कर महात्मा गांधी के विचारों को कफन पहनाया : डिंपल

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सरकार ने छात्रों पर बल प्रयोग कर महात्मा गांधी के विचारों को कफन पहनाया : डिंपल

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 10:23 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 10:23 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि नीट प्रश्नपत्र लीक का विरोध कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करके सरकार ने महात्मा गांधी के विचारों को कफन पहना दिया।

उन्होंने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए पिछले 40 दिनों में आत्महत्या करने वाले 20 विद्यार्थियों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब 2024 में कानून लाया गया था, तब भी यह लीकेज क्यों हुई? कहीं यह सरकार का षडयंत्र तो नहीं है? या तो यह षडयंत्र है या सरकार के सिस्टम में परमानेंट लीकेज है।’’

सपा सांसद ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान दिखे ‘जेन जेड’ के हौसले की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासन से मुकाबला किया और अहंकारी सरकार के आगे झुकने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग (महात्मा) गांधी जी के विचारों के साथ सत्य अहिंसा की लड़ाई लड़ रहे थे, आपने उन्हें कफन पहनाने का काम किया। गांधी जी के विचारों को कफन पहनाने का काम किया।’’

डिंपल यादव ने कहा, ‘‘आपने बेटियों के कपड़े फाड़े, पैलेट गन चलाए, कील लगे डंडे से बच्चों के सिर फोड़े और बिहार में एके-47 का इस्तेमाल किया।’’

उन्होंने भाजपा सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आपातकाल वाकई में देखना था तो आपको सड़कों पर आकर देखना था, जब बच्चे खून बहा रहे थे उस समय आप संसद में सुरक्षित रूप से बैठे हुए थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक सांसद बच्चों को अराजक तत्व कह रहे थे। क्या आप हमारे बच्चों को अराजक कहेंगे?’’

कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार ने मन से और सोच समझ कर यह विधेयक नहीं लाया। इसी तरह का कानून 2024 में भी बना था और संशोधन विधेयक में आपने सजा का प्रावधान कड़ा कर दिया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘‘त्वरित अदालत भाजपा का नया जुमला है।’’

उन्होंने कहा कि कानून बनाना ही था तो उसमें पहली पंक्ति यह होनी चाहिए थी कि अगली बार नीट पेपर लीक होगा तो शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पहले आएगा।

हुड्डा ने कहा, ‘‘ 12 साल आपकी सरकार रहने के बाद हमारी युवा पीढ़ी चौराहे पर आ गई, यह आपका रिपोर्ट कार्ड है। बारह साल बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था भी चौपट हो गई इसलिए युवाओं को आगे आना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने किसान आंदोलन, पहलवानों के विरोध प्रदर्शन को दबाने की तर्ज पर ही इस छात्र आंदोलन पर अपने उसी ‘टूल किट’ का इस्तेमाल किया।

लोजपा (रामविलास) के अरूण भारती ने विधेयक का समर्थन करते हुए सुझाव दिया कि जो व्यक्ति पेपर लीक की सूचना देता है उसे संरक्षण मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर रद्द परीक्षा की जांच सार्वजनिक होनी चाहिए और इसे सदन के पटल पर रखी जानी चाहिए।

कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सदन में उपस्थित नहीं होने का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री यह नहीं सुनना चाहते कि देश के सांसद क्या कह रहे हैं।

उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के छर्रे से लगी चोटों वाले कई वीडियो सामने आने का हवाला देते हुए गृह मंत्री से सदन में आने तथा एक निष्पक्ष जांच का आदेश देने की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस की शर्मिला सरकार ने कहा कि जंतर मंतर पर यह दिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और हर किसी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन ‘‘हमारे प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल करना निंदनीय है। हम छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की भी निंदा करते हैं।’’

शिवसेना (उबाठा) के अरविंद सावंत ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 10-15 साल में मैंने ऐसा आंदोलन नहीं देखा, ‘‘कॉकरोच डटकर खड़े रहे।’’

उन्होंने मुंबई में रिया अहीर नाम की लड़की के पुलिस वाहन के सामने डटकर खड़े होने का भी उल्लेख किया।

सावंत ने नीट अभ्यर्थियों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि सदन में ‘‘जितने बड़े लोग हैं उनके बच्चे कहां पढ़ रहे हैं, एक-एक का नाम लेकर बोल सकता हूं कि किनके बच्चे कहां पढ़ते हैं।’’

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान लड़कियों के साथ जो बर्बरता की गई वह कहीं भी देखने को नहीं मिला था।

आईयूएमएल के ई टी मोहम्मद बशीर ने कहा कि नीट संकट महज एक परीक्षा संकट नहीं, बल्कि जन विश्वास का संकट है।

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एक विश्वविद्यालय की कई इमारतों को ढहाने के लिए एक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया।

भाषा

सुभाष अविनाश

अविनाश