ग्रैंड वेनिस मॉल ‘घोटाले’ में सतिंदर सिंह भसीन को मिली जमानत रद्द

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ग्रैंड वेनिस मॉल ‘घोटाले’ में सतिंदर सिंह भसीन को मिली जमानत रद्द

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 04:53 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 04:53 PM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में करोड़ों रुपये के कथित ग्रैंड वेनिस मॉल घोटाले से जुड़े मामले में कारोबारी सतिंदर सिंह भसीन को दी गई जमानत बृहस्पतिवार को रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने भसीन को जेल अधिकारियों के समक्ष एक हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता ने छह नवंबर 2019 के आदेश के तहत उस पर लागू की गई जमानत संबंधी शर्तों का पालन नहीं किया है। लिहाजा, याचिकाकर्ता को दी गई जमानत रद्द की जाती है। याचिकाकर्ता को इस फैसले की तारीख से एक हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा।”

शीर्ष अदालत ने कहा कि भसीन दिवालियापन की कार्यवाही में पारित आदेशों का पूरी तरह से पालन करने की शर्त पर 12 महीने की अवधि के बाद नियमित जमानत के लिए नये सिरे से आवेदन कर सकते हैं।

भसीन की कंपनियों के खिलाफ दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की गई थी।

पीठ ने कहा, “यह निर्देश दिया जाता है कि इस न्यायालय की अनुमति के बिना निचली अदालत की ओर से याचिकाकर्ता का पासपोर्ट जारी नहीं किया जाएगा।”

उच्चतम न्यायालय ने भसीन की ओर से जमानत की शर्त के तहत जमा किए गए 50 करोड़ रुपये और उस पर अर्जित ब्याज राशि को भी जब्त करने का आदेश दिया।

पीठ ने कहा, “हम उपर्युक्त राशि में से पांच करोड़ रुपये और उस पर आनुपातिक रूप से अर्जित ब्याज राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) को उसके उद्देश्यों की प्राप्ति में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश देते हैं।”

उसने कहा, “बाकी राशि, आनुपातिक रूप से अर्जित ब्याज सहित आईबीसी संबंधी कार्यवाही के लिए आईआरपी (अंतरिम समाधान पेशेवर) को उपलब्ध कराई जाए। इस न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) यह सुनिश्चित करें कि संबंधित निचली अदालत उपरोक्त राशियों का तत्काल वितरण करे।”

शीर्ष अदालत ने भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सतिंदर सिंह भसीन को ग्रैंड वेनिस मॉल ‘घोटाला’ मामले में छह नवंबर 2019 को विभिन्न शर्तों के अधीन जमानत दे दी थी।

इस कथित घोटाले के सिलसिले में परियोजना में इकाइयों के आवंटियों ने नयी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई लोगों के खिलाफ करीब 46 प्राथमिकी दर्ज कराई थीं।

याचिकाकर्ताओं ने उन्हें इकाइयों का कब्जा न दिए जाने, उनके धन की हेरा-फेरी किए जाने और राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से भूमि आवंटन में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया था।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश