नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा को बताया कि दिल्ली और एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के जिलों में कुल भूजल निकासी का एक बड़ा हिस्सा घरेलू उद्देश्यों के लिए होता है, जिसमें ऊंची इमारतों में इसका उपयोग भी शामिल है।
जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कुल भूजल दोहन का 71.88 प्रतिशत घरेलू उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
गाजियाबाद में यह आंकड़ा 15.62 प्रतिशत, गौतम बुद्ध नगर में 3.21 प्रतिशत, फरीदाबाद में 18.6 प्रतिशत, गुरुग्राम में 11.81 प्रतिशत और सोनीपत में 13.24 प्रतिशत है।
मंत्री ने बताया कि ये आंकड़े घरेलू उपयोग के लिए भूजल के कुल दोहन को दर्शाते हैं, जिसमें ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंट भी शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण भूजल के अवैध दोहन के लिए भारी जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) शुल्क लगाने सहित कड़े उपाय कर रहा है, और उपयुक्त मामलों में बोरवेल को सील करने की कार्रवाई भी कर रहा है।
मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि देशभर में 431 बाढ़ प्रबंधन परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनसे लगभग 51.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की रक्षा हुई है।
चौधरी ने कहा कि ये परियोजनाएं बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी) के बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम के तहत पूरी की गई हैं।
वहीं, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि देश भर में निगरानी किए गए लगभग 73 प्रतिशत कुओं में, 2025 में मानसून के बाद की अवधि के दौरान भूजल स्तर में 2015-2024 के बीच के दशकीय औसत की तुलना में बढ़ोतरी हुई है।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश