जयपुर में हड्डी के कैंसर से पीड़ित बच्चों को ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ से बार-बार सर्जरी से राहत

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जयपुर में हड्डी के कैंसर से पीड़ित बच्चों को ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ से बार-बार सर्जरी से राहत

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  • Publish Date - March 12, 2026 / 10:39 AM IST,
    Updated On - March 12, 2026 / 10:39 AM IST

जयपुर, 12 मार्च (भाषा) बच्चों में होने वाले हड्डी के कैंसर के उपचार के लिए ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ एक आधुनिक तकनीक के रूप में सामने आया है। हड्डियों के कैंसर के कारण बच्चों की हड्डी का हिस्सा निकालना पड़ता है, लेकिन अब विशेष प्रकार के ‘इम्प्लांट’ की मदद से हड्डियों की लंबाई को बच्चे की बढ़ती उम्र के अनुसार समायोजित किया जा सकता है।

जयपुर में भगवान महावीर कैंसर अस्पताल के हड्डी शल्य चिकित्सक डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बच्चों की हड्डियां लगातार बढ़ती रहती हैं, इसलिए सामान्य ‘इम्प्लांट’ कई बार लंबे समय तक उपयुक्त नहीं रहते। इसी समस्या के समाधान के लिए ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ विकसित किए गए हैं, जो बच्चे की बढ़ती उम्र के साथ उनकी हड्डियों की लंबाई को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं।

उन्होंने बताया कि ‘इम्प्लांट’ मुख्य रूप से दो प्रकार से लगाए जाते हैं। पहला वह जिसमें बच्चे के शरीर में लगाए गए ‘इम्प्लांट’ की लंबाई समय-समय पर ऑपरेशन के माध्यम से बढ़ाई जाती है। आमतौर पर लगभग हर छह महीने में एक छोटा ऑपरेशन कर ‘इम्प्लांट’ की लंबाई बढ़ाई जाती है, ताकि वह बच्चे की प्राकृतिक वृद्धि के अनुरूप रहे। यह प्रक्रिया आमतौर पर 13 वर्ष की आयु तक जारी रहती है।

डॉ. प्रवीण ने बताया कि दूसरा और आधुनिक प्रकार का ‘इम्प्लांट’ रिमोट कंट्रोल तकनीक पर आधारित होता है। इसमें बार-बार ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस ‘इम्प्लांट’ में विशेष ‘मैग्नेटिक मैकेनिज्म’ लगा होता है, जिसकी मदद से डॉक्टर बाहर से रिमोट कंट्रोल के जरिए कमांड देकर ‘इम्प्लांट’ की लंबाई बढ़ा सकते हैं। यह प्रक्रिया अस्पताल में कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि आधुनिक तकनीक से बच्चों को बार-बार होने वाली सर्जरी से राहत और उनकी सामान्य शारीरिक वृद्धि को बनाए रखने में मदद मिलती है। ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ जैसी तकनीक के उपयोग से अब हड्डियों के कैंसर से प्रभावित बच्चों के लिए बेहतर और प्रभावी उपचार के नए रास्ते खुल गए हैं।

जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और विभागाध्यक्ष मेडिकल ओंकोलॉजिस्ट स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट डॉ. संदीप जसूजा ने बताया कि ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ नयी तकनीक है। इसमें बार-बार ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती है। आने वाले समय में इसके अच्छे परिणाम आएंगे।

भाषा बाकोलिया शोभना सुरभि मनीषा

मनीषा