गुजरात विधानसभा: एससी, ओबीसी व अल्पसंख्यकों के लिए ‘कम’ बजट आवंटन के विरोध में कांग्रेस का बहिर्गमन

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गुजरात विधानसभा: एससी, ओबीसी व अल्पसंख्यकों के लिए 'कम' बजट आवंटन के विरोध में कांग्रेस का बहिर्गमन

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 06:45 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 06:45 PM IST

गांधीनगर, 26 फरवरी (भाषा) कांग्रेस विधायकों ने अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों के लिए अपर्याप्त बजट आवंटन तथा आवंटित धनराशि खर्च नहीं किये जाने का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को गुजरात विधानसभा से बहिर्गमन किया।

विपक्ष ने विरोध तब शुरू किया जब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मनीषा वकील अपने विभाग के अंतर्गत आने वाले 10 बोर्डों और निगमों को आवंटित अनुदानों से संबंधित प्रश्नों का उत्तर दे रही थीं।

कांग्रेस के शैलेश परमार ने निधि आवंटन के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, ‘‘क्या आवंटन जनसंख्या के आधार पर किया गया है या आवेदक की आर्थिक स्थिति के आधार पर?’’

उन्होंने दावा किया कि गुजरात की लगभग 68 प्रतिशत आबादी वाले समुदायों को अपेक्षाकृत कम आवंटन प्राप्त हो रहा है।

इसके जवाब में वकील ने अपने विभाग के अंतर्गत आने वाले बोर्डों और निगमों द्वारा पिछले पांच वर्षों में उपयोग किए गए अनुदानों के आंकड़े प्रस्तुत किए।

उन्होंने बताया कि 2021-22 में 332.29 करोड़ रुपये, अगले वर्ष 467.27 करोड़ रुपये, 2023-24 में 432.02 करोड़ रुपये, 2024-25 में 640.68 करोड़ रुपये और चालू वित्त वर्ष में जनवरी तक 243.99 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यह राशि कुल मिलाकर 2,116.25 करोड़ रुपये है।

मंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को ऋण प्रदान करने वाले इन निगमों के अलावा, अनुसूचित जाति से संबंधित योजनाओं के लिए विभाग का कुल आवंटन 7,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

कांग्रेस विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि आवंटित धनराशि के एक बड़ा हिस्से का उपयोग नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 2024 में सफाई कामदार विकास निगम के लिए आवंटित धनराशि का लगभग 28 प्रतिशत उपयोग नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम को आवंटित धनराशि का 40 प्रतिशत, गुजरात पिछड़ा वर्ग विकास निगम को आवंटित राशि का 35 प्रतिशत, ठाकुर एवं कोली विकास निगम को प्राप्त राशि का 58 प्रतिशत और गुजरात गोपालक विकास निगम को आवंटित धनराशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अप्रयुक्त पड़ा है।

उन्होंने पूछा, ‘‘सबसे पहले तो, जनसंख्या के अनुपात में आवंटन बहुत कम है और इसके बावजूद 50 प्रतिशत तक राशि अप्रयुक्त रह जाती है। आवंटन के मानदंड क्या हैं, और इतनी बड़ी धनराशि खर्च क्यों नहीं हो पाती है?”

वकील ने कहा कि उनके द्वारा उद्धृत आंकड़े दिसंबर तक के हैं और आमतौर पर वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में व्यय बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि ठाकुर और कोली विकास निगम के लिए 2024-25 में 101.10 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले दिसंबर तक 86.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि 2025-26 में 101.65 करोड़ रुपये के अनुदान के मुकाबले अब तक 23.69 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

जब परमार ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्री धनराशि आवंटन के लिए अपनाए गए मानदंडों के संबंध में उनके मूल प्रश्न का स्पष्ट उत्तर दें, तो वकील ने दोहराया कि इन बोर्डों और निगमों को धनराशि देने के अलावा विभाग पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त बजट खर्च करता है।

वकील के जवाब पर असंतोष जताते हुए कांग्रेस के सभी 12 विधायक सदन से बाहर चले गए। उनका दावा था कि सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है और अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के लिए आवंटन अपर्याप्त है।

कांग्रेस विधायकों के बहिर्गमन के बाद कृषि मंत्री जीतू वघानी ने विपक्ष पर विधानसभा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी सदस्यों ने बिना अनुमति के मंत्री के भाषण को बार-बार बाधित किया।

भाजपा विधायक रमनभाई वोरा ने कांग्रेस पर ‘सस्ती लोकप्रियता’ हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश

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