चुनावी चंदा-कर चोरी मामले में गुजरात सीआईडी ने तीन ‘राजनीतिक दलों’ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की

चुनावी चंदा-कर चोरी मामले में गुजरात सीआईडी ने तीन ‘राजनीतिक दलों’ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की

चुनावी चंदा-कर चोरी मामले में गुजरात सीआईडी ने तीन ‘राजनीतिक दलों’ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की
Modified Date: September 26, 2026 / 09:12 pm IST
Published Date: September 26, 2026 9:12 pm IST

अहमदाबाद, 26 सितंबर (भाषा) गुजरात सीआईडी-अपराध ने शनिवार को तीन तथाकथित राजनीतिक संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इन पर वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच कथित तौर पर ‘चुनावी चंदा घोटाले’ के जरिये सरकारी खजाने को 314 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने आणंद स्थित स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (एसएपी), अहमदाबाद स्थित सत्यवादी रक्षक पार्टी (एसआरपी) और गरीब कल्याण पार्टी (जीकेपी) के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।

इन दलों ने कथित तौर पर करदाताओं से चंदा लिया और अपना कमीशन काटने के बाद बाकी रकम वापस कर दी। चूंकि राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर आयकर से छूट होती है, इसलिए दानदाता स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के बदले मिली रसीद दिखाकर कर में छूट का दावा कर सकते थे।

सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि ये प्राथमिकी आयकर विभाग की शिकायत पर दर्ज की गई हैं।

तीनों दलों के पदाधिकारियों के अलावा कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को भी आरोपी बनाया गया है।

सीआईडी अधिकारियों का दावा है कि तीनों दलों के आरोपी पदाधिकारियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने कर चोरी में मदद करके कमीशन कमाने के उद्देश्य से ही इन दलों का गठन किया था। मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

आयकर विभाग की शिकायत के अनुसार, एसएपी, उसके पदाधिकारी, एक कर सलाहकार और एक सीए 519 करोड़ रुपये के फर्जी चंदे और 155 करोड़ रुपये की कर चोरी से जुड़े मामले में शामिल हैं।

एक अन्य प्राथमिकी में अहमदाबाद स्थित जीकेपी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत नौ लोगों तथा तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को 62 करोड़ रुपये की कर चोरी में संलिप्तता को लेकर नामजद किया गया है।

तीसरी प्राथमिकी एसआरपी के तीन पदाधिकारियों और एक कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट के खिलाफ दर्ज की गई है। उन पर 124.5 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की साजिश रचने का आरोप है।

प्राथमिकी के अनुसार, तीनों दलों के बैंक खातों में चंदा जमा किया गया। इसके बाद फर्जी खरीद या खर्च दिखाकर नकली बिल के आधार पर धनराशि निकाली गई। प्राथमिकी के अनुसार, इसके बाद दल अपना कमीशन काटकर बाकी नकद राशि दानदाताओं को वापस कर देते थे।

प्राथमिकी में कहा गया है कि इन दलों ने कथित तौर पर मिलीभगत करके निर्वाचन आयोग को झूठी योगदान रिपोर्ट सौंपी, जिससे उन्हें मिले चंदे की 30 प्रतिशत राशि के बराबर वित्तीय नुकसान सरकारी खजाने को हुआ।

आरोपी सीए ने कथित तौर पर इन संस्थाओं और कुछ मुखौटा कंपनियों के खातों के लिए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की।

सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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