अहमदाबाद, सात सितंबर (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने सोमवार को जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चैतर वसावा को नौ सितंबर से शुरू होने वाले राज्य विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र में शामिल होने के लिए सात दिन की अस्थायी जमानत दे दी।
वसावा वडोदरा केंद्रीय कारागार में बंद हैं। वसावा और आठ अन्य लोगों को आपराधिक हमले और वसूली के एक मामले में नर्मदा जिले की एक सत्र अदालत ने जेल की सजा सुनायी थी।
न्यायमूर्ति विमल के. व्यास ने सोमवार को उनकी याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उन्हें इस शर्त के साथ रिहाई की तारीख से सात दिनों के लिए जमानत दे दी कि वह राज्य की राजधानी गांधीनगर से बाहर नहीं जाएंगे और न ही मीडियाकर्मियों या किसी सभा को संबोधित करेंगे।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि बहुत पहले अवसर दिए जाने के बावजूद उन्होंने विधानसभा के लिए कोई प्रश्न प्रस्तुत नहीं किया था, इसलिए अदालत को इस याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए।
सरकार ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय उनकी याचिका पर विचार करता भी है, तो यह तीन दिन से अधिक के लिए नहीं होनी चाहिए और इसमें उचित शर्तें होनी चाहिए, जिनमें यह शामिल है कि वह मीडिया को संबोधित न करें, किसी भी राजनीतिक सभा में भाग न लें और गांधीनगर न छोड़ें।
वसावा के वकील ने 15 दिन की अस्थायी जमानत का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा कि यदि वसावा को विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए राज्य द्वारा आमंत्रित किया गया है और वह स्वीकार्य रूप से एक विधायक के रूप में अयोग्य नहीं हैं, तो राज्य उनकी याचिका का विरोध कैसे कर सकता है।
नर्मदा जिले के राजपीपला की एक सत्र अदालत ने 23 जून को सरकारी वन भूमि पर अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई के बाद वन अधिकारियों पर हमला करने और उनसे 60,000 रुपये की वसूली करने के मामले में वसावा, उनकी पत्नी, निजी सहायक और छह अन्य को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
वे वन अधिकारियों पर हमले, उन्हें डराने-धमकाने और उनसे वसूली में शामिल पाए गए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन अधिकारियों ने एक मामला दर्ज करने के बाद अनधिकृत फसलों को हटा दिया था, जिसके बाद अधिकारियों को चैतर वसावा के आवास पर बुलाया गया था।
अभियोजन ने कहा कि वहां एक वन अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया गया, विधायक द्वारा उसे थप्पड़ मारा गया और धमकी दी गई, जबकि दहशत पैदा करने के लिए हवा में कथित तौर पर गोली चलाई गई थी। अभियोजन पक्ष ने बताया कि अगले दिन वन अधिकारियों को कथित तौर पर 60,000 रुपये देने के लिए मजबूर किया गया था।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा