गुजरात उच्च न्यायालय ने हमले के मामले में ‘आप’ विधायक चैतर वसावा की जमानत याचिका खारिज की

गुजरात उच्च न्यायालय ने हमले के मामले में ‘आप’ विधायक चैतर वसावा की जमानत याचिका खारिज की

गुजरात उच्च न्यायालय ने हमले के मामले में ‘आप’ विधायक चैतर वसावा की जमानत याचिका खारिज की
Modified Date: August 24, 2026 / 04:17 pm IST
Published Date: August 24, 2026 4:17 pm IST

अहमदाबाद, 24 अगस्त (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने मारपीट और जबरन वसूली के मामले में सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चैतर वसावा की जमानत याचिका खारिज कर दी।

इससे पहले नर्मदा जिले की सत्र अदालत ने वसावा और आठ अन्य लोगों को सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

वसावा को अब तक राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य नहीं ठहराया गया है।

न्यायमूर्ति विमल के. व्यास की एकल पीठ ने वसावा की सजा पर रोक लगाने और जमानत की याचिका खारिज करते हुए कहा कि विधानसभा सदस्य होने के नाते उन्हें डराने-धमकाने और सरकारी कर्मचारियों पर दबाव डालने से परहेज करना चाहिए था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘विधायक ने वन भूमि पर अतिक्रमण करने और अनधिकृत तरीके से खेती करने वाले लोगों को मुआवजा दिलाने और उसका भुगतान कराने की व्यवस्था की। विधायक होने के नाते उनका यह व्यवहार सार्वजनिक पद के संदर्भ में उनके उचित आचरण पर सवाल खड़ा करता है।’’

अदालत ने यह भी कहा कि एक अन्य मामले में जमानत पर रहते हुए उन्होंने खुले तौर पर जमानत की शर्त का उल्लंघन किया और अपने समर्थकों के लाभ के लिए बार-बार विभिन्न अपराधों में शामिल होते रहे।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इस तरह के आचरण को उनके पद के अनुरूप नहीं माना जा सकता।’’

अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सजा पर रोक लगाने और आरोपी को जमानत देने से समाज में यह धारणा पैदा हो सकती है कि सत्तासीन लोग कानून से ऊपर हैं और वे किसी डर तथा कानूनी परिणामों की चिंता किए बगैर अपराध कर सकते हैं।

इस साल 23 जून को राजपीपला की एक सत्र अदालत ने वन अधिकारियों से मारपीट और जबरन वसूली के 2023 के मामले में वसावा, उनकी पत्नी, निजी सहायक और छह अन्य लोगों को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

घटना 30 अक्टूबर, 2023 को हुई थी और दो नवंबर, 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

इस मामले में नौ दोषियों में से उच्च न्यायालय ने वसावा की पत्नी शकुंतलाबेन और कुछ अन्य लोगों को जमानत दे दी।

वसावा फिलहाल वडोदरा केंद्रीय जेल में बंद हैं।

वसावा और अन्य लोगों पर वन अधिकारियों से मारपीट करने और 60,000 रुपये की जबरन वसूली करने का आरोप है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन अधिकारियों ने एक मामला दर्ज करने के बाद अनधिकृत फसलों को हटा दिया था, इसके बाद अधिकारियों को चैतर वसावा के घर बुलाया गया था।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वहां एक वनकर्मी को विधायक ने कथित तौर पर गाली दी, थप्पड़ मारा, और धमकी दी, जबकि डर पैदा करने के लिए कथित तौर पर हवा में हथियार लहराया गया।

अगले दिन वन अधिकारियों पर 60,000 रुपये देने के लिए कथित तौर पर दबाव डाला गया।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में