नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तराखंड इकाई के कुछ नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की 15 दिन तक राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा को कांग्रेस से उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है।
रावत ने राजनीति से 15 दिन तक ‘‘व्रत’’ रखने का ऐलान उस समय किया है जब शनिवार को भाजपा की उत्तराखंड इकाई के कुछ नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में इन नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से जुड़े समारोह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रावत मौजूद नहीं रहेंगे।
रावत ने एक बयान में कहा, ‘‘बिजली-पानी की दरें बढ़ाने के सरकार के इरादे के खिलाफ एक घंटे के मौन व्रत के पश्चात, मैंने मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की आराधना की और शांत मन से अपने सार्वजनिक जीवन के 60 वर्षों की राजनीतिक यात्रा पर बहुत कुछ मनन किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि इन 60 वर्षों की अथक यात्रा के बाद मुझे एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अर्जित अवकाश लेने का अधिकार प्राप्त हो गया है और मैं अर्जित अवकाश की पहली किश्त के रूप में 15 दिन तक राजनीतिक सोच व राजनीतिक कार्यों से व्रत रखूंगा।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना, कुछ ईद मिलन व मांगलिक समारोह में भाग लेंगे।
रावत ने कहा, ‘‘इन 15 दिनों में, मैं अपनी जीवन यात्रा के उन प्रसंगों और मोड़ों को उकेरने की कोशिश करूंगा, जो समय के साथ बहुत नीचे कहीं चले गए हैं।’’
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शनिवार को दिल्ली में उत्तराखंड प्रदेश भाजपा के कुछ नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि जो नेता कांग्रेस का दाम थाम सकते हैं उनमें रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल, ऊधमपुर के सितारगंज से नारायण पाल, घनशाली से भीमलाल आर्य, भीमताल से लाखन नेगी, और रुड़की से गौरव गोयल के नाम प्रमुख हैं।
उत्तराखंड में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव संभावित है।
भाषा हक
हक नेत्रपाल
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