नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए ‘हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई करने पर सहमत हो गया।
भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया, जिसे पीठ ने उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी।
भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने मामले का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘वह पिछले तीन दिन से हिरासत में है, मैं अनुरोध करता हूं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका आज ही सूचीबद्ध की जाए।’’
रविवार को भारद्वाज को ऑनलाइन माध्यम से एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था और एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
कथित हमले को लेकर भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा यहां संसद मार्ग थाने के बाहर किए गए विरोध-प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद चार सितंबर को बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिया गया था।
दिल्ली पुलिस ने जून में जंतर-मंतर पर कॉजपा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता संजय कुमार पर कथित हमले को लेकर भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में अनुसचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी के प्रावधानों को जोड़ा है। उसके खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम का मामला भी दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारी के बाद पांच सितंबर को भारद्वाज को यहां एक सत्र न्यायाधीश के आवास पर पेश किया गया, जिन्होंने आरोपी से एक दिन की हिरासत में पूछताछ की दिल्ली पुलिस की अर्जी को स्वीकार कर लिया था।
पुलिस की ओर से यह कार्रवाई एक साक्षात्कार पर जनाक्रोश के बाद की गई जिसमें भारद्वाज ने दावा किया था कि उसने 23 जून के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता का ‘‘सिर फोड़ दिया था’’ और अपने राजनीतिक रसूख के कारण गिरफ्तारी से बच गया।
भारद्वाज ने साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मैंने सिर फोड़ दिया… क्या आप जानते हैं कि यह अपराध किस धारा के तहत आता है? धारा 307। उसे 60 टांके लगे थे।’’
भाषा खारी वैभव
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