Muzaffarnagar Riots Anniversary News: एक बार फिर ताजा हुए मुजफ्फरनगर दंगों के जख्म, यूपी के कई जिलों में लगे पोस्टर, पोस्टरों पर लिखा- ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’

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Muzaffarnagar Riots Anniversary News: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर रविवार को प्रदेश के कई जिलों में पोस्टर लगाए गए हैं।

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  • Publish Date - September 7, 2026 / 11:49 AM IST,
    Updated On - September 7, 2026 / 11:50 AM IST

Muzaffarnagar Riots Anniversary News/Image Credit: X Handle

HIGHLIGHTS
  • मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर प्रदेश के कई जिलों में पोस्टर लगाए गए हैं।
  • पोस्टरों पर लिखा- ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’
  • पोस्टरों ने 2013 की हिंसा और तत्कालीन सपा सरकार की भूमिका को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।

Muzaffarnagar Riots Anniversary News: लखनऊ: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर रविवार को प्रदेश के कई जिलों में लगाए गए पोस्टरों ने एक बार फिर 2013 की हिंसा और तत्कालीन सपा सरकार की भूमिका को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे।’

पोस्टर लगाए जाने के दौरान कुछ जिलों में विवाद की स्थिति भी बनी। पोस्टरों का विरोध करने पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं और इन्हें लगाने वाले लोगों के बीच कहासुनी और झड़प की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। पोस्टरों और उनके विरोध ने दंगों की बरसी पर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

मुजफ्फरनगर दंगो में हुई थी 60 से ज्यादा लोगों की मौत

Muzaffarnagar Riots Anniversary News:  सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि 50 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि हिंसा पर नियंत्रण के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी।

उस समय प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार थी। कानून-व्यवस्था संभालने और समय रहते हिंसा रोकने में नाकामी को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे। सपा सरकार पर दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण देने के आरोप भी लगे थे, जिन्हें पार्टी खारिज करती रही है।

एक बार फिर ताजा हुए मुजफ्फरनगर दंगों के जख्म

Muzaffarnagar Riots Anniversary News:  दंगों के बाद राहत शिविरों और विस्थापित परिवारों की स्थिति को लेकर भी तत्कालीन सरकार विपक्ष के निशाने पर रही थी। वहीं, उस दौर में सैफई महोत्सव को लेकर भी अखिलेश सरकार की आलोचना हुई थी। विपक्ष ने इसे दंगा पीड़ितों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता से जोड़कर सवाल उठाए थे।

अब 13 साल बाद दंगों की बरसी पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में लगे पोस्टरों और उन्हें लेकर हुई झड़पों ने मुजफ्फरनगर दंगों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

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