उच्च न्यायालय ने वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में रहने के महिला के फैसले में दखल देने से इनकार किया

उच्च न्यायालय ने वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में रहने के महिला के फैसले में दखल देने से इनकार किया

उच्च न्यायालय ने वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में रहने के महिला के फैसले में दखल देने से इनकार किया
Modified Date: August 31, 2026 / 07:01 pm IST
Published Date: August 31, 2026 7:01 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित के बनाए आश्रम में रहने का फैसला करने वाली एक महिला के मामले में दखल देने से सोमवार को इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह किसी बालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ कुछ करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि वह महिला के माता-पिता की याचिका पर ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकती, क्योंकि महिला ने अदालत में कहा था कि उसका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर है और वह 2015 से बिना किसी डर या दबाव के आध्यात्मिक विश्व विद्यालय आश्रम में रह रही है।

पीठ ने कहा, ‘‘क्या कोई अदालत किसी बालिग व्यक्ति को किसी जगह जाने का निर्देश दे सकती है? संविधान उसे कुछ आजादियां देता है, जिनमें कहीं भी आने-जाने की आजादी भी शामिल है। क्या हम उसे किसी खास जगह जाने का निर्देश दे सकते हैं? जैसे कि अपने माता-पिता से मिलने के लिए?’’

महिला के माता-पिता उससे मिलना चाहते थे। उन्होंने पिछले हफ्ते आरोप लगाया कि रोहिणी आश्रम में रहने वालों को नशीली दवाएं दी जा रही थीं और वे लोग किसी भी चीज के लिए अपनी मर्जी से सहमति देने की मानसिक स्थिति में नहीं थे।

अपनी अर्जी में, उन्होंने दिल्ली सरकार से यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की कि उनकी बेटी को आश्रम से रिहा किया जाए।

तब, अन्य कैदियों ने दावा किया था कि याचिकाकर्ताओं की बेटी लापता है।

हालांकि, वह महिला सोमवार को खुद अदालत में पेश हुई और कहा कि उसका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर है और वह 2015 से अपनी मर्जी से आश्रम में रह रही है। उसने स्पष्ट किया कि वह बिना किसी डर या दबाव के आश्रम में रह रही है।

हालांकि, (महिला के) माता-पिता के वकील ने आरोप लगाया कि आश्रम वहां रहने वाली महिलाओं की आवाजाही पर ‘‘रोक’’ लगा रहा है, लेकिन अदालत ने बेटी के बयान को देखते हुए कहा कि उनकी अर्जी पर किसी फैसले की जरूरत नहीं है।

अदालत ने कहा कि जब तक कोई महिला खुद सामने आकर यह शिकायत नहीं करती कि उसे रोका जा रहा है, तब तक कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने कहा कि वह 23 सितंबर को आश्रम के कामकाज के मामले पर विचार करेगा।

दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि आश्रम में अभी लगभग 100 महिलाएं रह रही हैं और वहां कोई नाबालिग नहीं है।

अदालत ने दिल्ली के विजय विहार पुलिस थाने के प्रभारी को ‘गुमशुदा व्यक्ति’ का मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश उस वक्त दिया गया जब आश्रम में रहने वाली महिलाओं ने दावा किया कि एक महिला ‘‘लापता’’ हो गई है, जबकि उसका सामान अभी भी आश्रम परिसर में ही पड़ा हुआ है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


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