शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने से जुड़े बीएनएस के प्रावधान लागू करने की याचिका खारिज

शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने से जुड़े बीएनएस के प्रावधान लागू करने की याचिका खारिज

शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने से जुड़े बीएनएस के प्रावधान लागू करने की याचिका खारिज
Modified Date: August 31, 2026 / 07:10 pm IST
Published Date: August 31, 2026 7:10 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक वकील की ओर से दायर उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के उस प्रावधान को लागू करने की मांग की गई थी, जो शादी के झूठे वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने से संबंधित है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वकील एन. सुदर्शनाराव द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज करने से पहले उसे ‘‘पूरी तरह से अपमानजनक, बेतुका और अदालत की अवमानना ​​करने वाला’’ करार दिया।

न्यायालय के दो न्यायाधीशों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका को खारिज करते हुए, पीठ ने सुदर्शनराव से यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी ‘‘अपमानजनक’’ याचिका दायर करने से पहले वे ‘‘सावधानी’’ बरतें।

इस जनहित याचिका में बीएनएस, 2023 की धारा 69 को लागू करने, शादी का झूठा वादा कर यौन शोषण पीड़िता महिलाओं को कानूनी मान्यता और आर्थिक सुरक्षा देने, और उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

बीएनएस की धारा 69 के तहत, धोखे से या शादी का झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध को अपराध माना गया है।

इस धारा में लिखा है, ‘‘जो कोई भी धोखे से या किसी महिला से शादी करने का वादा करके — बिना उसे पूरा करने के इरादे के — उसके साथ यौन संबंध बनाता है (और ऐसा यौन संबंध दुष्कर्म नहीं माना जाता है), उसे 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।’’

इस प्रावधान को सख्ती से लागू करने संबंधी निर्देश देने के अनुरोध के अलावा, याचिका में ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित महिलाओं के लिए कानूनी मान्यता या ‘‘पत्नी का दर्जा’’ दिलाने, और साथ ही आरोपी से गुजारा-भत्ता, आर्थिक सहायता और मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई थी।

जनहित याचिका में शादी से पहले के रिश्तों से जुड़े एक फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को भी चुनौती दी गई थी।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


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