गैंग चार्ट मंजूरी प्रक्रिया में जिलाधिकारी को बाहर रखने पर उच्च न्यायालय ने गृह विभाग से मांगा जवाब

गैंग चार्ट मंजूरी प्रक्रिया में जिलाधिकारी को बाहर रखने पर उच्च न्यायालय ने गृह विभाग से मांगा जवाब

गैंग चार्ट मंजूरी प्रक्रिया में जिलाधिकारी को बाहर रखने पर उच्च न्यायालय ने गृह विभाग से मांगा जवाब
Modified Date: January 13, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: January 13, 2026 10:36 pm IST

प्रयागराज, 13 जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था वाले जिलों में गैंग चार्ट को मंजूरी देने के लिए होने वाली संयुक्त बैठक से जिलाधिकारी को बाहर रखने का औचित्य स्पष्ट करने में विफल रहने पर अपर मुख्य सचिव (गृह) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियां (निरोध) अधिनियम, 1986 के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार की खिंचाई की।

इस पर चिंता व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने नौ जनवरी को पारित आदेश में कहा कि सबसे नेक इरादे और देखने में महान विचार भी अयोग्य प्रशासकों के हाथों में पड़ने पर विफल हो सकते हैं।

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अदालत राजेंद्र त्यागी और दो अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ताओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर कानून के प्रावधानों को लागू करने में पुलिस शक्तियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया गया है।

अपीलकर्ताओं ने दलील दी कि गैर- कमिश्नरेट जिलों में गैंगस्टर नियमों के तहत गैंग चार्ट को मंजूरी देने से पहले जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक अनिवार्य है।

हालांकि, गाजियाबाद कमिश्नरेट में यह शक्ति केवल पुलिस आयुक्त द्वारा प्रयोग की जा रही है और इस प्रक्रिया में जिला मजिस्ट्रेट को शामिल नहीं किया जा रहा है।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है।

भाषा सं राजेंद्र खारी

खारी


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