मोदी की स्नातक डिग्री के खुलासे के विरुद्ध अपील पर 29 सितंबर को सुनवाई
मोदी की स्नातक डिग्री के खुलासे के विरुद्ध अपील पर 29 सितंबर को सुनवाई
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्नातक डिग्री की जानकारी देने से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ आरटीआई आवेदकों द्वारा दायर की गयी अपीलों को बृहस्पतिवार को 29 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ताओं के अनुरोध पर इसे 29 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करें।’’
खंडपीठ से अनुरोध किया गया था कि कुछ अन्य मामलों के बाद इस मामले पर सुनवाई की जाए।
इन अपीलों में एकल न्यायाधीश के अगस्त 2025 के आदेश को चुनौती दी गयी है। एकल न्यायाधीश ने मोदी की डिग्री का खुलासा करने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के फैसले को खारिज कर दिया था।
अपीलकर्ताओं के वकील ने बृहस्पतिवार को कहा कि पिछली बार अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय को अपील दाखिल करने में हुई देरी पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समय दिया था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गुण-दोष के आधार पर विश्वविद्यालय का पक्ष मजबूत है और हो सकता है कि वह देरी से अपील दाखिल करने के मुद्दे पर कोई आपत्ति न करें।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं देरी का बहुत ज्यादा विरोध नहीं करूंगा। गुण-दोष के आधार पर मेरा पक्ष मजबूत है। तो, मैं देरी का विरोध क्यों करूं?’’
इससे पहले सॉलीसीटर जनरल ने दावा किया था कि ‘‘इस मामले में कुछ भी बचा नहीं था’’ और यह ‘‘सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए’’ था।
खंडपीठ के सामने अपील करने वालों में आरटीआई कार्यकर्ता नीरज, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और वकील मोहम्मद इरशाद शामिल हैं।
एकल न्यायाधीश ने 25 अगस्त 2025 को केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को रद्द कर दिया और कहा था कि चूंकि मोदी एक सार्वजनिक पद पर हैं, सिर्फ इतने भर के लिए उनकी सारी ‘निजी जानकारी’ सार्वजनिक नहीं की जा सकती है।
एकल न्यायाधीश ने कहा था कि मांगी गयी जानकारी में कोई भी ‘जनहित निहित नहीं है’ जबकि आरटीआई अधिनियम सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया था, न कि ‘सनसनी के वास्ते मसाला देने’ के लिए।
नीरज के आरटीआई आवेदन पर सीआईसी ने 21 दिसंबर, 2016 को उन सभी विद्यार्थियों के रिकॉर्ड देखने की इजाज़त दे दी थी जिन्होंने 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा पास की थी। इसी साल मोदी ने भी यह परीक्षा पास की थी।
एकल न्यायाधीश ने छह याचिकाओं पर एक साथ आदेश दिया था। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय की वह याचिका भी शामिल थी जिसमें सीआईसी के आदेश को चुनौती दी गई थी। सीआईसी ने विश्वविद्यालय को मोदी की स्नातक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने सीआईसी के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को अदालत के सामने अपने रिकॉर्ड दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है।
एकल न्यायाधीश ने राय व्यक्त की थी कि किसी सरकारी पद पर रहने या आधिकारिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए शैक्षिक योग्यताएं किसी कानूनी ज़रूरत के दायरे में नहीं आतीं।
एकल न्यायाधीश ने कहा था कि अगर किसी खास सरकारी पद के लिए शैक्षिक योग्यताएं ज़रूरी शर्त होतीं, तो स्थिति अलग हो सकती थी। एकल न्यायाधीश ने सीआईसी के नज़रिए को ‘पूरी तरह से गलत’ बताया।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश

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