जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की ‘निगरानी’ के खिलाफ जनहित याचिका पर 20 जुलाई को उच्च न्यायालय में सुनवाई

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की ‘निगरानी’ के खिलाफ जनहित याचिका पर 20 जुलाई को उच्च न्यायालय में सुनवाई

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 06:35 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 06:35 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘नीट-यूजी’ परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन की पुलिसकर्मियों द्वारा निगरानी किये जाने के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका पर 20 जुलाई को सुनवाई करने के लिए शुक्रवार को सहमति जताई।

जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ (जेएनएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि पुलिसकर्मी विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर मोबाइल फोन और कैमरे लेकर घूम रहे हैं, जिससे प्रदर्शनकारी छात्रों का मनोबल टूट रहा है।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस का आचरण प्रदर्शनकारियों के निजता के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है।

वरिष्ठ वकील द्वारा अदालत से जनहित याचिका की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किये जाने के बाद, मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने इसे सोमवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा, ‘‘हम इसकी सुनवाई (बुधवार से, जब जनहित याचिकाओं की सुनवाई होती है) से पहले कर रहे हैं। सोमवार को आइए।’’

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) 26 दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

वकील सुभाष चंद्रन केआर के मार्फत दायर की गई याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की ‘‘लगातार और व्यापक निगरानी’’ संवैधानिक रूप से गलत है तथा इसे लोक व्यवस्था बनाए रखने या राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

याचिका में, अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर की जा रही फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी को तुरंत रोकें, जब तक कि ‘‘लोक व्यवस्था के लिए कोई तत्काल, वास्तविक और आसन्न खतरा’’ न हो, जो ऐसे उपायों को उचित ठहराता हो।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप