केजरीवाल, सिसोदिया की रिहाई के खिलाफ याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई 16 जुलाई को होगी
केजरीवाल, सिसोदिया की रिहाई के खिलाफ याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई 16 जुलाई को होगी
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक तथा अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त करने के अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 16 जुलाई तय की।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने कहा कि ऐसा लगता है कि जिन तीन आप नेताओं का प्रतिनिधित्व नहीं किया गया था उनकी तरफ से तीन ‘वकालतनामा’ दाखिल किए गए हैं। इन तीन नेताओं ने पहले न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सुनवाई का बहिष्कार किया था।
अदालत ने आगे की सुनवाई स्थगित कर दी ताकि वकीलों की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके, क्योंकि आज उच्च न्यायालय में वकील काम से विरत (हड़ताल पर) थे।
‘वकालतनामा’ एक ऐसा प्राधिकार पत्र होता है जो किसी वकील द्वारा अदालत में किसी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
अदालत ने कहा, ‘‘यदि उन्होंने वकालतनामा दाखिल किया है, तो अगली सुनवाई में हम देख सकते हैं कि कौन सी तारीख दी जा सकती है और एक कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है… ऐसा लगता है कि कोई वकालतनामा दाखिल किया गया है।’’
न्यायाधीश ने यह टिप्पणी करते हुए मामले की सुनवाई 16 जुलाई को सूचीबद्ध की।
हालांकि, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले सुनवाई का कार्यक्रम तय करने के लिए मामले को बुधवार को सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। इस पर न्यायमूर्ति मनोज ने कहा कि अदालत जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित मामलों को प्राथमिकता दे रही है।
आबकारी नीति से जुड़ा यह मामला न्यायमूर्ति जैन के समक्ष तब आया जब न्यायमूर्ति शर्मा ने इस महीने की शुरुआत में केजरीवाल, सिसोदिया, पाठक और अन्य के खिलाफ कथित तौर पर उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के आरोप में अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के बाद इसे अपने बोर्ड से हटा दिया था।
जब 19 मई को यह मामला न्यायमूर्ति जैन के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, तो उन्होंने सीबीआई को आम आदमी पार्टी के नेताओं को पीठ में बदलाव की सूचना देने के लिए कहा था।
अधीनस्थ अदालत ने 27 फरवरी को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को शराब नीति मामले में आरोपमुक्त कर दिया था।
सीबीआई ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और नौ मार्च को न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ ने शराब नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की अधीनस्थ अदालत की सिफारिश पर रोक लगा दी।
आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अधीनस्थ अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होते हैं और उन पर विचार करने की आवश्यकता है।
इसके बाद, केजरीवाल, सिसोदिया, पाठक और कुछ अन्य प्रतिवादियों ने पक्षपात और हितों के टकराव की आशंका जताते हुए न्यायमूर्ति शर्मा से इस मामले से हटने का अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति शर्मा द्वारा 20 अप्रैल को उनकी उस याचिका खारिज कर दिया था जिसमें उनसे खुद को मामले से अलग करने का आग्रह किया गया था। इसके बाद केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से उनके समक्ष पेश नहीं होंगे और ‘महात्मा गांधी के सत्याग्रह मार्ग’ का अनुसरण करेंगे।
भाषा संतोष माधव
माधव

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