हिंदू धर्म ने विविधता को अपनाया, अन्य धर्मों को फलने-फूलने का अवसर दिया: उपराज्यपाल सिन्हा

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हिंदू धर्म ने विविधता को अपनाया, अन्य धर्मों को फलने-फूलने का अवसर दिया: उपराज्यपाल सिन्हा

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 04:50 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 04:50 PM IST

श्रीनगर, 27 जून (भाषा) जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है और इसने विविधता एवं सह-अस्तित्व को अपनाकर देश में अन्य धर्मों को फलने-फूलने का अवसर दिया।

उपराज्यपाल ने यह टिप्पणी यहां शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (एसकेआईसीसी) में राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) और ‘इंटर-फेथ हार्मनी फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ द्वारा आयोजित अंतरधार्मिक संवाद को संबोधित करते हुए की।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया यह मानती है कि हिंदू-सनातन धर्म, दुनिया का सबसे पुराना धर्म है और उसने कभी खुद को दूसरों पर थोपा नहीं। इसके बजाय उसने विविधता और सह-अस्तित्व को अपनाया। प्राचीन भारत ने सम्मान की ऐसी नींव रखी, जिससे ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी धर्म और पारसी धर्म को फलने-फूलने की स्वतंत्रता मिली।’’

उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘आज दुनिया धर्म, भाषा और नस्ल के आधार पर विभाजित हो सकती है, लेकिन भारतीय विचारधारा में इन विभाजनों को पाटने की अनूठी क्षमता है।’’

सिन्हा ने कहा कि भारत एक जीवंत विचार है, जो यह संदेश देता है कि मानवता को एक परिवार के रूप में साथ रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथ, वेद और उपनिषद पांच हजार साल से भी पुरानी ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं और उन्होंने हमेशा सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की शिक्षा दी है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसने मानवता को सिखाया कि अलग-अलग आस्थाओं को मानने वाले लोगों को एक-दूसरे की मान्यताओं का सम्मान करते हुए साथ रहना चाहिए। यही शाश्वत सिद्धांत है। हजारों साल पहले हमारे ऋषियों ने कहा था कि सत्य किसी एक मार्ग तक सीमित नहीं है। सत्य अनंत है और उस तक पहुंचने के कई रास्ते हैं।’’

सिन्हा ने कहा कि इसीलिए भारत हमेशा विविधता को विभाजन नहीं बल्कि एक वरदान के रूप में देखता है। यह दृष्टिकोण भारत के मुकुट माने जाने वाले जम्मू कश्मीर में भी दिखाई देता है, जहां सदियों से सद्भाव और सह-अस्तित्व की भावना जीवन का हिस्सा रही है।

भाषा प्रचेता गोला

गोला