आपातकाल लोकतंत्र नहीं, इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने का फैसला था : रामबहादुर राय

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आपातकाल लोकतंत्र नहीं, इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने का फैसला था : रामबहादुर राय

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 04:26 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 04:26 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) आपातकाल से पहले बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने वाले राम बहादुर राय ने दावा किया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोपा था।

वरिष्ठ पत्रकार राय ने इस दावे को गलत करार दिया कि इंदिरा गांधी ने सेना को सरकार का आदेश नहीं मानने की जयप्रकाश नारायण की सलाह के कारण आपातकाल लगाया था।

आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने वाले राय ‘प्रज्ञा प्रवाह’ और ‘जिज्ञासा’ की ओर से राष्ट्रीय कला केंद्र में वरिष्ठ पत्रकार अजय सेतिया की नवीनतम पुस्तक ‘‘आपातकाल : आंदोलन और विश्वासघात की अंतर्कथा’’ के विमोचन और ‘‘आपातकाल के सबक’’ विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय के अलावा के. एन गोविंदाचार्य और राजकुमार भाटिया कार्यक्रम में मुख्य वक्ता थे। पुस्तक लेखक अजय सेतिया और तीनों अन्य वक्ता भी आपातकाल के दौरान जेल में रहे थे।

सेतिया ने कहा कि सिद्धार्थ शंकर रे ने शाह आयोग के सामने कबूल किया था कि आपातकाल का फैसला जयप्रकाश नारायण के भाषण से पहले ही किया जा चुका था।

उन्होंने बताया कि पुस्तक में आपातकाल के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के ‘‘सत्याग्रह और भूमिगत आंदोलन’’ पर विस्तार से चर्चा की गई है।

सेतिया ने कहा कि इस पुस्तक में कई ऐसे दस्तावेज और तथ्य शामिल किए गए हैं, जो पहले व्यापक रूप से सामने नहीं आए थे।

रामबहादुर राय ने कहा कि इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल देश की आंतरिक सुरक्षा के कारण नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए लिया गया राजनीतिक निर्णय था।

उन्होंने कहा कि उस समय जिन परिस्थितियों का हवाला देकर आपातकाल लगाया गया, वे वास्तविकता से परे थीं।

भाटिया ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे नयी पीढ़ी तक तथ्यात्मक रूप में पहुंचाना आवश्यक है। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।

भाषा अविनाश शफीक

अविनाश