‘भारतीय खेलों में उनके योगदान ने अमिट छाप छोड़ी’: कांग्रेस ने जसपाल राणा के निधन पर कहा

‘भारतीय खेलों में उनके योगदान ने अमिट छाप छोड़ी’: कांग्रेस ने जसपाल राणा के निधन पर कहा

‘भारतीय खेलों में उनके योगदान ने अमिट छाप छोड़ी’: कांग्रेस ने जसपाल राणा के निधन पर कहा
Modified Date: June 12, 2026 / 02:10 pm IST
Published Date: June 12, 2026 2:10 pm IST

नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) कांग्रेस ने भारत के सर्वश्रेष्ठ पिस्टल निशानेबाजों में से एक और मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले जसपाल राणा के निधन पर शुक्रवार को शोक व्यक्त किया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय खेलों में उनके विशाल योगदान ने देश पर एक स्थायी और अमिट छाप छोड़ी है।

राणा के परिवार में पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, पुत्र युवराज, पिता नारायण सिंह राणा तथा उनके भाई-बहन सुषमा सिंह और सुभाष राणा हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीय खेलों के एक महान स्तंभ और हमारे सबसे महान निशानेबाजी चैंपियन में से एक जयपाल राणा के निधन से मैं बेहद दुखी हूं।’’

उन्होंने कहा,‘‘ विश्व मंच पर भारत को गौरव दिलाने से लेकर आने वाली पीढ़ियों के निशानेबाजों को प्रशिक्षित करने तक, भारतीय खेलों में उनका योगदान वास्तव में असाधारण है…।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उनके परिवार, मित्रों और पूरे खेल जगत के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।’’

वहीं राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘ भारत के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजी चैंपियन में से एक और एक ऐसे मार्गदर्शक के निधन से मैं बेहद दुखी हूं, जिन्होंने खिलाड़ियों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ उत्कृष्टता के प्रति उनकी समर्पण की भावना और भारतीय खेलों में उनके विशाल योगदान ने हमारे राष्ट्र पर एक स्थायी छाप छोड़ी है। मैं उनके परिवार, प्रियजन और पूरे खेल जगत के प्रति हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।’’

अपने मुखर स्वभाव, बेबाक टिप्पणी करने और खेल के प्रति जुनून के कारण भारतीय निशानेबाजी जगत में विद्रोही माने जाने वाले इस पूर्व निशानेबाज में असाधारण प्रतिभा थी और उन्होंने महज 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था।

वर्ष 1994 के राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतना उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बड़ी सफलता थी। दरअसल एशियाई खेलों का उनका स्वर्ण पदक राजा रणधीर सिंह के 1978 में सोने का तमगा जीतने के 16 साल बाद भारत का पहला स्वर्ण पदक था। रणधीर सिंह का हाल ही में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझने के बाद निधन हो गया था।

एक निशानेबाज के रूप में राणा के करियर का सबसे बड़ा क्षण 2006 के दोहा एशियाई खेलों में आया जब उन्होंने तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता, जिसमें उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करना भी शामिल था।

एक उत्कृष्ट निशानेबाज के रूप में शानदार करियर के बाद राणा जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच और ‘हाई परफॉर्मेंस कोच’ के रूप में अपनी भूमिकाओं से भारतीय निशानेबाजी में बदलाव लेकर आए।

कोच के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलता पेरिस में 2024 में खेले गए ओलंपिक खेलों में मनु भाकर को दो कांस्य पदक जीतने में मदद करना था।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


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