यूएपीए मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज, पत्रकार इरफान मेहराज की जमानत पर रोक से इनकार

यूएपीए मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज, पत्रकार इरफान मेहराज की जमानत पर रोक से इनकार

यूएपीए मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज, पत्रकार इरफान मेहराज की जमानत पर रोक से इनकार
Modified Date: July 21, 2026 / 07:31 pm IST
Published Date: July 21, 2026 7:31 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज 2020 के एक मामले में मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के वकील ने 18 जुलाई को निचली अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर अपराधों से संबंधित है और दोनों आरोपियों को राहत ‘‘बिना किसी ठोस वजह के दी गई।’’

एनआईए ने यह भी दलील दी कि यह जमानत आदेश अन्य मामलों में मिसाल के तौर पर उद्धृत किया जाएगा, जिससे ‘‘प्रतिकूल प्रभाव’’ पड़ेगा और समस्याएं उत्पन्न होंगी।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया एनआईए की अपील पर नोटिस जारी किया जाना न्यायोचित है, क्योंकि निचली अदालत ने यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विचार नहीं किया।

पीठ ने कहा कि निचली अदालत कोई संवैधानिक अदालत नहीं है और उसे कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होता है। आदेश में आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला न बनने संबंधी कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया गया है, जिस पर विचार किया जाना आवश्यक है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए दोनों आरोपियों पर कुछ अतिरिक्त शर्तें लगाईं और स्पष्ट किया कि इस आदेश को भविष्य में किसी मामले में नजीर नहीं माना जाएगा।

पीठ ने एनआईए के वकील से कहा, ‘‘ये शर्तें पर्याप्त हैं। यदि आपको आगे कुछ अनुचित लगता है, तो आप अदालत का रुख कर सकते हैं।’’

मामले की सुनवाई अगस्त में तय करते हुए अदालत ने परवेज और मेहराज को सप्ताह में दो बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने, आरोपपत्र में नामजद किसी भी व्यक्ति से संपर्क न करने तथा इस प्रकार की किसी गतिविधि में शामिल न होने का निर्देश दिया।

जमानत देते समय निचली अदालत ने दोनों आरोपियों को दिल्ली से बाहर न जाने और अपने पासपोर्ट जमा कराने का भी निर्देश दिया था।

एनआईए ने दलील दी कि दोनों आरोपियों की रिहाई राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाने वाली होगी, इसलिए जमानत आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।

यह मामला कश्मीर स्थित कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), ट्रस्ट और समितियों पर आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के लिए कथित वित्तपोषण करने से संबंधित है।

परवेज ‘जम्मू कश्मीर कोलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी’ (जेकेसीसीएस) का कार्यक्रम समन्वयक था। एनआईए का आरोप है कि यह संगठन मानवाधिकार संरक्षण की आड़ में आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने और कश्मीर घाटी में अलगाववादी एजेंडा का प्रसार करने में शामिल था।

एनआईए के वकील ने कहा कि निचली अदालत ने केवल इस आधार पर जमानत दी कि मुकदमे की सुनवाई शुरुआती चरण में है और आरोप मुख्य रूप से मौखिक गवाही पर आधारित है।

वहीं, परवेज और मेहराज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि जब तक जमानत आदेश स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण या मनमाना न हो, उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

अदालत को यह भी बताया गया कि हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने परवेज को यूएपीए के एक अन्य मामले में भी जमानत दी है।

दोनों आरोपियों को मार्च 2023 में गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 10 जून को यूएपीए के एक अन्य मामले में परवेज को जमानत देते हुए कहा था कि वह चार वर्ष से अधिक समय से जेल में है और मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


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