भूख हड़ताल: आइसा कार्यकर्ताओं की हालत बिगड़ी

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भूख हड़ताल: आइसा कार्यकर्ताओं की हालत बिगड़ी

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 09:02 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 09:02 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे तीन आइसा कार्यकर्ताओं की हालत शुक्रवार को और बिगड़ गई। चिकित्सकों ने इनमें से एक को हाइपोग्लाइसीमिया (रक्त शर्करा का बेहद कम स्तर) के कारण अस्पताल में तत्काल भर्ती कराने की सलाह दी है।

छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने बताया कि तीनों कार्यकर्ता नेहा, आमीन और मनीष 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं लेकिन केंद्र सरकार उनकी मांगों पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है।

आइसा ने एक बयान में कहा कि नेहा का रक्त शर्करा स्तर बेहद कम हो गया है और चिकित्सकों ने उन्हें अनशन समाप्त कर अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है, ताकि उनकी स्थिति और खराब न हो।

संगठन के अनुसार, आमीन में यूरिक एसिड का स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है और उनका वजन करीब 14 प्रतिशत कम हो गया है। मनीष का वजन 10 किलोग्राम से अधिक घट गया है और उसके बेहोश होने की आशंका है।

आइसा ने बताया कि 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता ने शुक्रवार को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों के प्रति समर्थन जताया।

संगठन के मुताबिक, पीड़िता ने कहा कि नेहा समेत आइसा कार्यकर्ताओं ने उनका साथ दिया था और अब वह छात्रों के संघर्ष को समर्थन देने आई हैं।

बयान में कहा गया कि आंदोलन को लगातार राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, राकांपा (शरद पवार) की नेता और सांसद सुप्रिया सुले, हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला और कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों के प्रति एकजुटता जताई।

आइसा कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा)’ नीत आंदोलन का हिस्सा हैं, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

प्रदर्शनकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की मांग कर रहे हैं।

कॉजपा ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया है और उससे पहले विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों का समर्थन आंदोलन के प्रति बढ़ता जा रहा है।

भाषा

राखी अविनाश

अविनाश