मेरा आशय जाति व्यवस्था को खत्म करने से था : उदयनिधि ने सनातन धर्म वाली टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया
मेरा आशय जाति व्यवस्था को खत्म करने से था : उदयनिधि ने सनातन धर्म वाली टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया
चेन्नई, 15 मई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में सनातन धर्म को समाप्त करने संबंधी अपनी टिप्पणी पर उठे नए विवाद के बीच कहा कि उनका आशय उस व्यवस्था को खत्म करने से था, जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में बांटती है।
उन्होंने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर न जाए। इसका मतलब यह है कि मंदिर में ही नहीं, बल्कि समाज में भी सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा, ‘‘जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में कहा कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए, तो कुछ लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं। मैं डरने वाला व्यक्ति नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही उभरा है। उसी संदर्भ में मैं एक छोटा-सा स्पष्टीकरण देना चाहता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं कहता हूं कि जाति व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई मंदिर न जाए। इसका मतलब यह है कि मंदिर में ही नहीं, बल्कि समाज में भी सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि उनका आशय उस व्यवस्था को समाप्त करने से था, जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में विभाजित करती है।
उदयनिधि ने कहा, ‘‘मैंने पेरियार, आंबेडकर, अन्ना और कलैग्नर द्वारा बताए गए सिद्धांतों के आधार पर ही बात की थी। हम किसी की ईश्वर में आस्था के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन असमानता और उत्पीड़न का हम मजबूती से विरोध करेंगे।’’
मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को ‘‘समाप्त’’ करने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि यह लोगों को विभाजित करता है। इस दौरान उन्होंने सितंबर 2023 में दिए गए अपने विवादित बयान को दोहराया था।
भाषा गोला शोभना
शोभना

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