नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि इस पार्टी के लिए कर्ताधर्ता असहमति के स्वर का सामना नहीं कर सकते तो यह मुख्य विपक्षी दल के लिए ‘विनाशकारी है’ तथा पार्टी को शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस आलाकमान को यह चुनौती भी दी कि वह राहुल गांधी के मुंह से राजीव गांधी का 1989 में दिया वह बयान फिर से दिलवाएं कि ‘‘सिर्फ धर्मिनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है।’’
अय्यर ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा उस वक्त खोला है जब उन्होंने बीते रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ की थी और उनके फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई थी, जिसके बाद कांग्रेस ने उनकी टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी से उनका कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर 23 मिनट 10 सेकेंड का एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने जवाहरलान नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय कांग्रेस में असहमति का सम्मान होने की बात कही।
उनका कहना है, ‘‘जब इंदिरा गांधी असहमति के कारण पार्टी तोड़कर अलग हुईं और आपातकाल लगाया तो परिणाम क्या निकला? कांग्रेस न सिर्फ हारी, बल्कि इंदिरा रायबरेली से और संजय गांधी अमेठी से हार गए।’’
अय्यर ने कहा कि जब आप कांग्रेस में विरोध को कुचलते हैं तो इसी तरह का परिणाम होता है।
उनका कहना था कि कांग्रेस असहमति के स्वर के कारण है और कांग्रेस कई आवाजों के होने के कारण बढ़ती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘जैसे कहा जाता है कि ईश्वर एक है और उस तक पहुंचने के रास्ते अलग अलग हैं, उसी तरह कांग्रेस एक है लेकिन कई रास्ते हैं जो कांग्रेस तक जाते हैं।’’
उनका कहना है कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के मौजूदा कर्ताधर्ताओं द्वारा यह सबक भुला दिया गया है।
उन्होंने राजीव गांधी के समय असहमति जताने वाले आरिफ मोहम्मद खान, वी पी सिंह और अरुण नेहरू का उल्लेख किया और कहा, ‘‘जो ईमानदारी से असहमति रखते थे वो कांग्रेस के रजनीतिक दायरे में रहे, जिन्होंने बेईमानी से असहमति की, उन्हें इतिहास ने खुद, शायद अल्लाह ताला ने सजा दी।’’
अय्यर ने कहा, ‘‘यदि कांग्रेस का मौजूदा तंत्र असहमति का सामना नहीं कर सकता तो यह कांग्रेस के लिए विनाशकारी है। असहमति लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि असहमति का विनम्रता और स्पष्टता के साथ जवाब नहीं दे सकते तो हमें शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।’’
उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि पांच मई, 1989 को राजीव गांधी ने लोकसभा में कहा था, ‘‘सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही बरकरार रह सकता है और यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है तो उसे कायम रहने का हकदार नहीं है।’’
अय्यर ने कहा,‘‘कांग्रेस अलाकमान से कहना चाहता हूं कि आपमें यह हिम्मत है कि राजीव गांधी के ये शब्द उनके पुत्र के मुंह से कहलवाएं।’’
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें कार्य समिति से बाहर कर रखा है।
उन्होंने ‘राजीव गांधी अमर रहे’ का नारा लगाकर अपनी बात खत्म की।
भाषा हक हक रंजन
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