शिक्षा ऋण की मांग में अब छोटे शहरों की बड़ी हिस्सेदारीः रिपोर्ट

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शिक्षा ऋण की मांग में अब छोटे शहरों की बड़ी हिस्सेदारीः रिपोर्ट

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 07:36 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 07:36 PM IST

मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) शिक्षा ऋण की मांग अब महानगरों के बजाय छोटे शहरों और कस्बों से तेजी से बढ़ रही है। बीते 19 महीनों में आए शिक्षा ऋण के 86.5 प्रतिशत से अधिक आवेदन दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से संबंधित रहे। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

यह रिपोर्ट ऋणदाता ‘कूहू फाइनेंस’ के मंच पर मिले 2.5 लाख से अधिक शिक्षा ऋण आवेदनों के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी, 2025 से जुलाई, 2026 के बीच मिले शिक्षा ऋण आवेदनों में पहली श्रेणी के शहरों की हिस्सेदारी 13.5 प्रतिशत रही।

राज्यों में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र क्रमशः 12.87 प्रतिशत और 12.52 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहे। इनके बाद कर्नाटक 7.16 प्रतिशत, बिहार 6.91 प्रतिशत और तमिलनाडु 6.77 प्रतिशत के साथ रहे। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में आवेदन मिले।

कुल ऋण वितरण में रोजगारपरक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की हिस्सेदारी 41.70 प्रतिशत रही। इसके बाद एमबीए कार्यक्रमों की 29 प्रतिशत, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की 9.80 प्रतिशत, इंजीनियरिंग की 5.50 प्रतिशत और चिकित्सा शिक्षा की 4.70 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।

कूहू मंच के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रशांत ए भोंसले ने कहा, ‘‘आंकड़ों से पता चलता है कि महत्वाकांक्षा अब महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी तेजी से बढ़ रही है।’’

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा तेजी से रोजगार परिणामों पर केंद्रित हो रही है और छात्र ऐसे वित्तपोषण की तलाश में हैं जो पारदर्शी, सुलभ और उनके दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप हो।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय