पुरी के जगन्नाथ मंदिर में कतार प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के लिए ली जा रही है आईआईटी की मदद
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में कतार प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के लिए ली जा रही है आईआईटी की मदद
भुवनेश्वर, 25 अगस्त (भाषा) ओडिशा सरकार ने पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में कतार प्रबंधन व्यवस्था लागू करने के लिए आईआईटी-भुवनेश्वर से सम्पर्क किया है। इसके तहत देवताओं के बेहतर दर्शन के लिए लकड़ी के रैंप भी बनाए जाएंगे। कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
हरिचंदन ने बताया कि आईआईटी-भुवनेश्वर ने कतार प्रबंधन के लिए विभिन्न प्रारूप तैयार किए हैं, जिन्हें भुवनेश्वर में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘जल्द ही सबसे बेहतर प्रारूप का प्रायोगिक मॉडल तैयार किया जाएगा और इसकी निगरानी छत्तीसा नियोग (सेवकों की शीर्ष संस्था) तथा मंदिर प्रशासन करेगा।’’
पुरी स्थित 12वीं सदी के इस मंदिर का संचालन कानून विभाग के अधीन है।
हरिचंदन ने कहा कि हर दिन लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और त्योहारों के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे भीड़ का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।’’
मंत्री ने कहा कि आईआईटी-भुवनेश्वर की कतार प्रबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर सकेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रस्ताव के अनुसार दर्शन के लिए पांच अलग-अलग रैंप का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे हर घंटे करीब 8,000 से 10,000 श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे दर्शन अधिक व्यवस्थित और सुगम होंगे।’’
हरिचंदन ने बताया कि ‘नाट मंडप’ और ‘जगमोहन’ (सभा कक्ष) के भीतर ऊंचे लकड़ी के रैंप लगाने के राज्य सरकार के मूल प्रस्ताव में अब काफी बदलाव किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने शुरुआत में देवताओं के बेहतर दर्शन के लिए लकड़ी के रैंप लगाने की योजना बनाई थी। हालांकि, अब आईआईटी-भुवनेश्वर डिजाइन को और बेहतर बनाने के लिए एक प्रायोगिक मॉडल तैयार कर रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पूरी तरह लागू करने से पहले इस मॉडल का परीक्षण किया जाएगा। अगले तीन से चार महीने में इसे पूरी तरह लागू करने की योजना है। संशोधित योजना के तहत ‘नाट मंडप’ और ‘जगमोहन’ में पांच से छह ऊंचे रैंप बनाए जाएंगे, ताकि श्रद्धालु दूर से ही देवताओं के स्पष्ट दर्शन कर सकें।’’
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के कारण ‘नाट मंडप’ में अक्सर भारी भीड़ हो जाती है।
एक अधिकारी ने कहा, ‘‘मौजूदा व्यवस्था के कारण कई श्रद्धालु निराश हो जाते हैं, क्योंकि वे देवताओं के ठीक से दर्शन नहीं कर पाते। नई व्यवस्था से न केवल भीड़ कम होगी, बल्कि श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक अनुभव भी बेहतर होगा।’’
भाषा अमित माधव
माधव

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