गुरुग्राम नगर निगम जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर विचार कर रहा

गुरुग्राम नगर निगम जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर विचार कर रहा

गुरुग्राम नगर निगम जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर विचार कर रहा
Modified Date: August 25, 2026 / 10:22 pm IST
Published Date: August 25, 2026 10:22 pm IST

गुरुग्राम, 25 अगस्त (भाषा) गुरुग्राम में एक बार फिर भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव होने के बीच नगर निगम के आयुक्त प्रदीप दहिया ने इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने के लिए मंगलवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-गांधीनगर के दो प्रोफेसर के साथ बैठक की।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आईआईटी-गांधीनगर के प्रोफेसर उदित भाटिया और प्रोफेसर विवेक कपाड़िया के साथ हुई बैठक में सुभाष चौक, राजीव चौक, मेदांता अंडरपास और शीतला माता रोड पर जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी विकल्पों पर चर्चा की गई।

बैठक में गुरुग्राम नगर निगम और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पार्षद भी शामिल हुए।

इन इलाकों में बारिश के पानी के प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में इन क्षेत्रों में बारिश का पानी जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए प्रति सेकंड 48 से 80 लीटर की क्षमता वाले विशेष कुएं बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा जल भंडारण के लिए भूमिगत टैंक बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। बयान में कहा गया कि इन उपायों का मकसद बारिश के दौरान पानी के प्रबंधन, भंडारण और निकासी की व्यवस्था को मजबूत करना तथा जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में समस्या का प्रभावी समाधान करना है।

नगर निगम आयुक्त ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्थाएं अनुमानित बारिश की मात्रा से तीन गुना अधिक पानी संभालने में सक्षम होंगी। उन्होंने इन्हें पूरा करने के लिए एक वर्ष की सख्त समयसीमा तय करने के निर्देश भी दिए।

दहिया ने तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत कर और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर जलभराव के लिहाज से संवेदनशील इलाकों के लिए दीर्घकालिक समाधान विकसित किए जाएंगे। इससे जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होगा, भूजल पुनर्भरण में मदद मिलेगी और जल निकासी व्यवस्था पर दबाव कम होगा।’’

भाषा

सिम्मी अविनाश

अविनाश


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