मौजूदा लोकसभा में विधेयकों को संयुक्त समितियों के पास भेजे जाने का सिलसिला बढ़ा

मौजूदा लोकसभा में विधेयकों को संयुक्त समितियों के पास भेजे जाने का सिलसिला बढ़ा

मौजूदा लोकसभा में विधेयकों को संयुक्त समितियों के पास भेजे जाने का सिलसिला बढ़ा
Modified Date: August 18, 2026 / 04:48 pm IST
Published Date: August 18, 2026 4:48 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक नरेन्द्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से संसद की संयुक्त समिति को भेजा जाने वाला 17वां विधेयक बन गया है।

यह जानकारी उपलब्ध आंकड़ों से सामने आई है।

वर्तमान यानी 18वीं लोकसभा में दोनों सदनों की संयुक्त समितियों को विधेयक भेजे जाने में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2024 में मौजूदा लोकसभा के गठन के बाद से अब तक नौ विधेयक संयुक्त समितियों को भेजे जा चुके हैं। इसके मुकाबले 16वीं और 17वीं लोकसभा में चार-चार विधेयक संयुक्त समितियों को भेजे गए थे।

इन 17 विधेयकों से संबंधित 14 संयुक्त समिति प्रक्रियाएं हुई हैं, क्योंकि कुछ विधेयकों को एक ही समिति के पास साथ-साथ भेजा गया था।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने वाले विधेयक के साथ दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर (विधानसभा वाले तीनों केंद्रशासित प्रदेशों) में प्रस्तावित कानून को लागू करने से संबंधित विधेयक भी भेजा गया था।

मौजूदा लोकसभा में संयुक्त समितियों को भेजे गए प्रमुख विधेयकों में वक्फ (संशोधन) विधेयक, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से संबंधित दो विधेयक, हिरासत में लिये जाने पर मंत्रियों को पद से हटाने से संबंधित तीन विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक और अब विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक शामिल हैं।

मोदी सरकार के पहले दो कार्यकाल में चार-चार विधेयक संयुक्त संसदीय समितियों (जेपीसी) को भेजे गए थे।

लोकसभा की वेबसाइट और विधायी मामलों पर शोध करने वाले थिंक टैंक ‘पीआरएस इंडिया’ के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें से कुछ विधेयक कानून बन गए, जबकि कुछ वापस ले लिये गए या निष्प्रभावी हो गए।

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समितियां और लोकसभा या राज्यसभा की प्रवर समितियां किसी विशेष विधेयक पर विचार के लिए गठित की जाती हैं। संबंधित रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इन समितियों को भंग कर दिया जाता है।

भाषा हक हक सुरेश

सुरेश


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