राज्यसभा में द्रमुक ने गैस संकट पर संसद में चर्चा कराये जाने की मांग की

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राज्यसभा में द्रमुक ने गैस संकट पर संसद में चर्चा कराये जाने की मांग की

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 03:35 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 03:35 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को द्रमुक ने देश में प्राकृतिक एवं रसोई गैस संकट बढ़ने का दावा करते हुए सरकार से इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करवाने और इसका समाधान निकालने की मांग की।

उच्च सदन में द्रमुक के तिरुचि शिवा ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यद्यपि भारत ने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध में सीधे कोई हिस्सा नहीं लिया है किंतु इस युद्ध का व्यापक प्रभाव पड़ा है विशेषकर ईंधन, प्राकृतिक गैस और रसोई गैस पर।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से निबटने के लिए हर राज्य बैठकें कर रहा है।

द्रमुक सदस्य ने कहा कि गैस की कमी के कारण रेस्त्रां बंद हो रहे हैं, कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी घरों में इसे लेकर चिंता जतायी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद बात है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं हो रही।

शिवा ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण भारत के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें परिस्थिति के अनुरूप काम करना चाहिए। सरकार संसद के प्रति जवाबदेह है तथा संसद लोगों के प्रति जवाबदेह है। जब लोगों को दिखेगा कि संसद काम कर रही है और इस मुद्दे पर विचार नहीं कर रही है तो उन्हें परेशानी होगी तथा हम जवाबदेह होंगे। ’’

द्रमुक सदस्य ने मनरेगा के स्थान पर लायी गयी वीबी जी राम जी योजना के तहत राज्यों पर 40 प्रतिशत का आर्थिक बोझ डालने का विरोध किया और कहा कि राज्य सरकार पर पहले से ही आर्थिक बोझ है।

चर्चा में भाग लेते हुए बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने कहा कि गांवों के विकास से ही देश का विकास संभव है। उन्होंने कहा कि गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, स्वच्छता, कृषि आदि पर जोर दिये बिना वास्तविक ग्रामीण विकास संभव नहीं हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में दलित एवं आदिवासी जिस भूमि पर 50 साल से अधिक समय से रह रहे हैं, आज उनको वहां से हटाया जा रहा है और उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। उन्होंने प्रश्न किया कि कि ऐसे में दलित एवं आदिवासी लोग कहां जाएंगे?

चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (उबाठा) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत की दो तिहाई से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और इसके प्रति सरकार को पूरी तरह से गंभीरता दिखानी चाहिए।

उन्होंने महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए कहा कि उनका राज्य कृषि संकट से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र सरकार वीबी जी राम जी योजना का बहुत प्रचार कर रही है किंतु इसके कारण राज्यों पर कितना आर्थिक बोझ आएगा, इस बारे में कोई प्रचार नहीं किया जा रहा। उन्होंने दावा कि इस सरकार के कार्यकाल में मनरेगा के तहत लोगों को साल भर में औसतन 48 दिन ही रोजगार मिल पाया है।

भाषा

माधव मनीषा

मनीषा