भारत और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री स्वतंत्रता और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर जोर दिया

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री स्वतंत्रता और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर जोर दिया

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री स्वतंत्रता और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर जोर दिया
Modified Date: June 1, 2026 / 04:56 pm IST
Published Date: June 1, 2026 4:56 pm IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) भारत और ऑस्ट्रेलिया ने पश्चिम एशिया संकट के बाद ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यवधानों तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर चिंताओं के बीच सोमवार को नौवहन की स्वतंत्रता, हवाई उड़ान की स्वतंत्रता और बिना बाधा समुद्री व्यापार के महत्व पर जोर दिया।

यह मुद्दे यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच व्यापक वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से सामने आए।

दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने के महत्व पर सहमति जताई ताकि एक स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही रक्षा उद्योग सहयोग और दोनों देशों के बीच सहभागिता के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया गया।

वार्ता के बाद सिंह और मार्ल्स ने घोषणा की कि दोनों देश रक्षा सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे, जो रक्षा औद्योगिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में अगला कदम होगा।

एक संयुक्त बयान में कहा गया कि ‘‘दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रूपरेखा को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।’’

इसमें कहा गया कि सिंह और मार्ल्स ने समुद्री गश्ती विमानों के माध्यम से सहयोगात्मक समुद्री क्षेत्र जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा समुद्र के नीचे जागरूकता को बढ़ाने के अवसर तलाशने पर सहमति जतायी।

संयुक्त बयान के अनुसार, ‘‘दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने के महत्व को दोहराया ताकि एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित किया जा सके।’’

इसमें कहा गया, ‘‘मंत्रियों ने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया और क्षेत्र में निर्बाध व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप समुद्र के अन्य वैध उपयोगों के लिए अपना मजबूत समर्थन व्यक्त किया।’

सिंह और मार्ल्स ने भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा औद्योगिक सहयोग और जुड़ाव के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया और भारत में कैनबरा के पहले रक्षा व्यापार मिशन का स्वागत किया।

उन्होंने रक्षा उद्योग, अनुसंधान और सामग्री पर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से भी आगे आदान-प्रदान की संभावनाओं पर सहमति व्यक्त की।

दोनों मंत्रियों ने ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक समन्वय का स्वागत किया और समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के लिए सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

सिंह और मार्ल्स ने क्वाड इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (आईपीएमसीएस) पहल के लिए अपना मजबूत समर्थन जताया जिसे प्रारंभ में हिंद महासागर क्षेत्र में, साथ ही विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और अभ्यासों के माध्यम से लागू किया जाएगा।

सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में मार्ल्स के साथ अपनी मुलाकात को ‘उत्कृष्ट’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हमने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और इसे और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी आने वाले वर्षों में स्थिर प्रगति करेगी।’’

भाषा अमित नरेश

नरेश


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