भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और आसियान की केंद्रीय भूमिका का आह्वान किया

भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और आसियान की केंद्रीय भूमिका का आह्वान किया

भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और आसियान की केंद्रीय भूमिका का आह्वान किया
Modified Date: July 22, 2026 / 06:58 pm IST
Published Date: July 22, 2026 6:58 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) भारत ने दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रमता के बीच अपने क्वाड सहयोगियों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की अपील की और इस क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका के आह्वान को दोहराया।

फिलीपीन की राजधानी मनीला में बुधवार को हुई बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भी शामिल हुए।

इससे पहले क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक मई के अंत में नयी दिल्ली में हुई थी, जब रुबियो भारत की यात्रा पर आए थे।

क्वाड में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं।

क्वाड ने एक संयुक्त बयान में कहा कि संगठन ने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत को मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और साथ ही ‘‘आसियान की एकता और केंद्रीयता’’ के प्रति ‘अटूट समर्थन’ व्यक्त किया।

दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) को इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है, और भारत तथा अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देश इसके संवाद साझेदार हैं।

क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा, ‘‘हम इस क्षेत्र की सफलता और आसियान तथा उसके सदस्य देशों के साथ सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’’

इसमें कहा गया है कि क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय चुनौतियों और ‘हिंद-प्रशांत संबंधी आसियान आउटलुक’ (एओआईपी) को व्यावहारिक रूप से लागू करने के अवसरों पर भी चर्चा की।

बयान के मुताबिक बैठक में समुद्री और सीमा पार सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों और मानवीय सहायता एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़ी प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बयान में विदेश मंत्रियों ने कहा, ‘‘हमारा दृढ़ विश्वास है कि हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता ही इस क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि का आधार है।’’

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने ‘हिंद-प्रशांत’ क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया और हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, ‘‘नयी दिल्ली में हाल ही में हुई बैठक के परिणामों पर आगे की कार्रवाई की गई। आसियान की केंद्रीय भूमिका को मानते हुए एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत की प्रतिबद्धता दोहराई गई।’’

रुबियो ने कहा कि क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रेखांकित किया गया कि मजबूत सहयोग ‘‘इस क्षेत्र में आसियान की अपनी प्राथमिकता और केंद्रीय भूमिका का समर्थन करने के लिए बहुत जरूरी है’’।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक ऐसे स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण को साझा करते हैं जो कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित है।

रुबियो ने कहा कि क्वाड एक प्राथमिकता बना हुआ है और हम इस साल के आखिर में फिर मिलेंगे।

जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्वाड बैठक में इस बात की पुष्टि हुई कि यह समूह समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा, अहम प्रौद्योगिकी और मानवीय सहायता पर केंद्रित ‘स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘पुख्ता सहयोग’ को आगे बढ़ाना जारी रखेगा।

मोतेगी ने कहा कि यह बहुत अहम बात है कि मई में हुई बैठक के बाद क्वाड मंत्री इतनी जल्दी फिर से मिले। बुधवार की बैठक से यह कड़ा संदेश जाता है कि क्वाड ऐसे सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे इस क्षेत्र को लाभ हो।

जापान के एक बयान में कहा गया, ‘‘चारों मंत्रियों ने पुष्टि की कि ‘क्वाड’ मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत (एफओआईपी) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ठोस सहयोग जारी रखेगा। इसमें समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा, अहम और उभरती हुई प्राद्योगिकी तथा मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे चार क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।’’

मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत और मध्य पूर्व (जिसमें पूर्वी चीन सागर और दक्षिणी चीन सागर भी शामिल हैं) की स्थितियों पर अपने-अपने नजरिए को खुले माहौल में साझा किया।

बयान के मुताबिक मोतेगी ने ‘‘ताकत या दबाव के दम पर एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की किसी भी कोशिश’’ का कड़ा विरोध किया और ‘‘अहम खनिजों समेत निर्यात पर लगी पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता’’ जताई। साथ ही, उन्होंने ‘‘उत्तर कोरिया को पूरी तरह परमाणु-मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता’’ को रेखांकित किया।

बयान के मुताबिक चारों देशों के विदेशमंत्रियों ने ‘‘अगले क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठक के आयोजन का बेसब्री से इंतज़ार होने की बात कही।’’

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश


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