भारत ने वियतनाम के साथ संबंधों को लेकर प्रतिबद्धता दोहरायी

भारत ने वियतनाम के साथ संबंधों को लेकर प्रतिबद्धता दोहरायी

भारत ने वियतनाम के साथ संबंधों को लेकर प्रतिबद्धता दोहरायी
Modified Date: November 29, 2022 / 07:52 pm IST
Published Date: January 7, 2022 3:12 pm IST

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) भारत ने वियतनाम के साथ राजनयिक संबंध स्थापित होने की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर अपने समग्र सामरिक गठजोड़ को लेकर शुक्रवार को अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ हमारे राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर हम भारत-वियतनाम समग्र सामरिक गठजोड़ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ’’हम अपने प्रधानमंत्रियों द्वारा स्थापित शांति, समृद्धि एवं लोगों की संयुक्त दृष्टि पर काम करना जारी रखेंगे। ’’

दक्षिण चीन सागर में चीनी सेना की आक्रामकता बढ़ने की पृष्ठभूमि में भारत और वियतनाम के बीच सामरिक संबंध आगे बढ़ रहे हैं।

दिसंबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यम से वियतनाम के अपने समकक्ष गुयेन जुआन फुक के साथ शिखर वार्ता की थी, जिसमें दोनों पक्षों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहित नौवहन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था।

वियतनाम, आसियान समूह का एक महत्वपूर्ण देश है और उसका दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद है।

भारत का दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के क्षेत्र में तेल उत्खनन करने की परियोजनाएं है।

चीन, पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपनी सम्प्रभुता का दावा करता है। यह क्षेत्र हाइड्रोकार्बन का एक बड़ा स्रोत है। हालांकि वियतनाम, फिलीपीन, ब्रुनेई जैसे कई देश भी इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा कर रहे है।

गौरतलब है कि जुलाई 2007 में वियतनाम के तत्कालीन प्रधानमंत्री गुयेन तान डंग ने भारत की यात्रा की थी और तब दोनों देशों के संबंध ‘सामरिक गठजोड़’ के स्तर पर ले जाए गए थे। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम की यात्रा की थी और दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाते हुए समग्र सामरिक गठजोड़ के मुकाम पर ले जाए गए।

भाषा दीपक दीपक सुभाष

सुभाष


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