नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भारत) राज्यसभा में सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों पक्ष वर्तमान में पारस्परिक लाभ वाले बहुक्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “दोनों देश राष्ट्रीय हितों पर आधारित विदेश नीतियां अपनाते हैं”, जिसमें व्यापार संबंधी चंद उपायों, प्रतिबंधों से संबंधित मुद्दों और विशिष्ट क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उनके दृष्टिकोण की झलक मिलती है।
सिंह ने कहा, “मतभेदों का समाधान उच्च स्तरीय और संस्थागत संवादों के माध्यम से किया जाता है।”
उन्होंने यह बात अमेरिका के साथ रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग पर भारत के “वर्तमान रुख” और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच समान रुख व मतभेद वाले क्षेत्रों के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही।
मंत्री ने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें आतंकवाद-विरोधी उपाय, रक्षा सहयोग, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी, सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला और एक स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता सहित कई वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर समान रुख है।”
उन्होंने कहा कि रक्षा साझेदारी “रणनीतिक समानता” और एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र की परिकल्पना से प्रेरित द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है।
मंत्री ने कहा कि सहयोग में सह-विकास और सह-उत्पादन, रक्षा औद्योगिक साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं, जो थल, समुद्री, वायु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में अंतर-संचालन को बढ़ावा देते हैं।
सिंह ने कहा, “व्यापार के मोर्चे पर, अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों पक्ष वर्तमान में पारस्परिक रूप से लाभकारी बहुक्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, दोनों पक्ष संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों, संस्थानों के परस्पर सहयोग से बने संस्थान, उत्कृष्टता केंद्रों और विदेशी परिसरों के माध्यम से संस्थागत संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय से व्यापार, प्रौद्योगिकी और उच्च शिक्षा पर भारत-अमेरिका संबंधों के प्रभाव के बारे में भी प्रश्न किया गया था।
मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2025 तक, 3,53,737 भारतीय छात्र अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी दूतावास में भारतीय समुदाय का कल्याण भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सिंह ने कहा कि अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास और उच्चायोग 24 घंटे चलने वाली आपातकालीन हेल्पलाइन, व्यक्तिगत मुलाकात, ईमेल, सोशल मीडिया और एमएडीएडी पोर्टल के माध्यम से शिकायतों और संकटकालीन कॉल पर प्राथमिकता के आधार पर राजनयिक सहायता प्रदान करते हैं।
एमएडीएडी (संकट में फंसे भारतवंशियों की सहायता में विदेश मंत्रालय) एक कांसुलर शिकायत निगरानी प्रणाली है।
सिंह ने बताया कि भारतीय समुदाय कल्याण कोष ( आईसीडब्ल्यूएफ) का उपयोग भी संकट में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा, “मंत्रालय दोनों देशों के दीर्घकालिक हित में जन-जन संबंधों और कुशल गतिशीलता के महत्व को रेखांकित करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।”
सिंह ने कहा कि हाल ही में हुई उच्च स्तरीय मुलाकातों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 12-13 फरवरी 2025 को वाशिंगटन की आधिकारिक सरकारी यात्रा और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की 21-24 अप्रैल 2025 को भारत की आधिकारिक यात्रा शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्री और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री भी अपने-अपने अमेरिकी समकक्षों से नियमित रूप से मुलाकात कर रहे हैं, इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच संसदीय प्रतिनिधिमंडलों सहित उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों का निरंतर आदान-प्रदान हो रहा है।
भाषा पारुल
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