जांजगीर। Pora Bai Case in CG: छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षा के लिए चर्चित पोराबाई नकल प्रकरण मामले में जांजगीर के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 12वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष 2008 में फर्जी तरीके से टॉप कराने के मामले में पोराबाई सहित चार आरोपियों को 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
बता दें कि वर्ष 2008 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में पोराबाई को फर्जी तरीके से टॉपर घोषित किया गया था। मामले की जांच के बाद प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन रहा। वर्ष 2020 में सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन शासन द्वारा इस फैसले के खिलाफ अपील की गई थी। शासन की अपील पर सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने पोराबाई समेत चार आरोपियों को दोषसिद्ध मानते हुए प्रत्येक को 5-5 वर्ष की सजा सुनाई है। वहीं, अन्य पांच आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला
Pora Bai Case in CG: 2008 में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित बारहवीं बोर्ड परीक्षा में पोरा बाई शामिल हुई थी। पोरा बाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा थी। उसने सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एग्जाम सेंटर 24189 में परीक्षा दी थी। 26 मई को परीक्षा का रिजल्ट आया, तो आरोपी पोरा बाई को मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। माध्यमिक शिक्षा मंडल के तत्कालीन सचिव को संदेह होने पर उप सचिव पीके पांडे द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच में पोरा बाई की उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी, हेराफेरी होने और अपात्र छात्रा को प्रवेश देकर जालसाजी किया जाना पाया गया। पोरा बाई के मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर जब जांच शुरू हुई तो उनकी उत्तरपुस्तिका बदली हुई मिली जिसमे उसकी हैंडराइटिंग नही थी। इस आधार पर जांच हुई और अपराध दर्ज किया गया।
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