व्यापार समझौते के बाद भारतीय डेटा संसाधन अमेरिका को ‘सौंप दिए गए’ : राहुल गांधी का आरोप

व्यापार समझौते के बाद भारतीय डेटा संसाधन अमेरिका को 'सौंप दिए गए' : राहुल गांधी का आरोप

व्यापार समझौते के बाद भारतीय डेटा संसाधन अमेरिका को ‘सौंप दिए गए’ : राहुल गांधी का आरोप
Modified Date: March 7, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: March 7, 2026 8:20 pm IST

तिरुवनंतपुरम, सात मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत का डेटा अमेरिका को सौंप दिया गया और उनके (राहुल) अलावा किसी ने भी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की।

राहुल ने यह दावा यहां टेक्नोपार्क में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के लोगों के साथ संवाद के दौरान डेटा सुरक्षा से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देते हुए किया।

उन्होंने कहा कि अगर भारत कहता कि उसका डेटा दुनिया में सबसे मूल्यवान है तो कृषि या लघु एवं मध्यम व्यवसायों पर कोई कर नहीं लगता।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल ने कहा, “मेरा मतलब है, अगर उस समझौते में भारत ने पलटकर कहा होता कि सुनिए, यह सब ठीक है, लेकिन हमारा डेटा दुनिया का सबसे मूल्यवान डेटा है। तो मैं आपको गारंटी दे सकता हूं कि कृषि पर कोई कर नहीं लगता। लघु एवं मध्यम व्यवसायों पर कोई कर नहीं लगता।’’

उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत में शामिल होने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपके पास क्या है।

गांधी ने कहा, “हमारे यहां बहुत विविधता है। इसलिए हम कई चीजों को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझ सकते हैं। हमारे पास इस ग्रह पर सबसे बड़ा डेटा भंडार है। हमारे पास सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग प्रतिभा है। हमारे पास सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा प्रतिभा है।’’

उन्होंने कहा, “केरल में सर्वश्रेष्ठ नर्स तैयार होते हैं। अब, आइए और मुझसे बातचीत कीजिए। मेरे पक्ष में क्या है, यह स्पष्ट रूप से समझे बिना मुझसे बातचीत मत कीजिए। बातचीत इसी तरह होनी चाहिए।”

गांधी ने कहा कि अगर रूस अपना पूरा तेल भंडार अमेरिका को सौंप दे, तो कितना हंगामा होगा। लेकिन, उन्होंने दावा किया कि जब केंद्र सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौते के तहत भारत का डेटा अमेरिका को सौंप दिया गया, तो भारत में “एक भी आवाज़ नहीं उठी”।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की राजनीति को जिन अहम प्रश्नों पर चर्चा करने की आवश्यकता है, उनमें से एक यह है कि देश के सबसे बड़े संसाधन डेटा का उपयोग कैसे किया जाए, इसकी प्रकृति क्या है, इस तक किसकी पहुंच है?

उन्होंने कहा, “ये वैसे प्रश्न हैं जिन पर वास्तव में राजनीतिक व्यवस्था को चर्चा करनी चाहिए। न कि इस बात पर कि हमें क्या खाना चाहिए और क्या पीना चाहिए और क्या गोमूत्र हमारे लिए अच्छा है। इसलिए, वास्तव में यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। यह सुनने की प्रक्रिया है, क्योंकि वास्तव में किसी के पास इसका जवाब नहीं है।’’

भाषा अविनाश दिलीप

दिलीप


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