शुल्क संबंधी अमेरिकी कानून को निरस्त करने की मांग करे भारत सरकार: माकपा
शुल्क संबंधी अमेरिकी कानून को निरस्त करने की मांग करे भारत सरकार: माकपा
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रूस और ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने के प्रावधान वाले अमेरिकी कानून की निंदा करते हुए मंगलवार को कहा कि भारत सरकार को इसे निरस्त कराने का प्रयास करना चाहिए।
माकपा ने एक बयान में कहा कि अमेरिका इस कानून के जरिये व्यापार को हथियार बनाने का प्रयास कर रहा है।
मुख्य विपक्षी दल ने कहा, ‘‘व्यापार को हथियार बनाकर अमेरिका यह अधिकार अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है कि कौन किससे तेल खरीदे। अन्य देशों की विदेश और आर्थिक नीतियों को निर्देशित करने वाला यह कानून उनकी संप्रभुता और गरिमा का खुला उल्लंघन है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’’
ट्रंप ने 18 सितंबर को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर के माध्यम से इसे कानून का रूप दिया था। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है।
माकपा ने कहा कि भारत आयातित कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर है और रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के कारण वह उन देशों में शामिल है जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
वामपंथी दल ने कहा, ‘‘मोदी सरकार को अमेरिका को रणनीतिक साझेदार मानने और अमेरिकी साम्राज्यवाद की डराने-धमकाने की रणनीति के आगे झुकने से बचना चाहिए।’’
इस बीच, माकपा महासचिव एम ए बेबी ने जर्मनी में वामपंथी नेता एलिफ एराल्प को 2026 के बर्लिन राज्य के चुनाव में जीत पर बधाई दी और कहा कि ‘‘न्यूयॉर्क से बर्लिन तक समाजवादी विकल्प जीत रहा है।’’
बेबी ने ‘एक्स’ पर एराल्प को उनकी पार्टी ‘डाई लिंके’ को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा, ‘‘कामरेड एलिफ एराल्प को डाई लिंके को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए हार्दिक बधाई। आशा है कि आप आवास अधिकार, सामाजिक न्याय और गरिमा पर केंद्रित अपने वादों को पूरा करने में सफल होंगी।’’
भाषा हक मनीषा
मनीषा

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