भारत की स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार तेंदुलकर-सूर्यवंशी के संयुक्त प्रदर्शन जैसी: संरा जलवायु प्रमुख

भारत की स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार तेंदुलकर-सूर्यवंशी के संयुक्त प्रदर्शन जैसी: संरा जलवायु प्रमुख

भारत की स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार तेंदुलकर-सूर्यवंशी के संयुक्त प्रदर्शन जैसी: संरा जलवायु प्रमुख
Modified Date: July 21, 2026 / 07:57 pm IST
Published Date: July 21, 2026 7:57 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने मंगलवार को कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक दौड़ में भारत मजबूत स्थिति में हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी की समझ रखने वाला युवा कार्यबल उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा समझौता (यूएनएफसीसी) के कार्यकारी सचिव स्टील ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही प्रगति की तुलना देश के स्टार क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी के संयुक्त प्रदर्शन से की।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की स्वच्छ ऊर्जा वृद्धि सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी के संयुक्त प्रदर्शन जैसी है। अब तक का रिकॉर्ड शानदार रहा है, लेकिन असली कहानी अभी शुरू हुई है। यदि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर दोगुना जोर देता है, तो आगे के अध्याय सचमुच असाधारण हो सकते हैं।’’

स्टील ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की बिक्री लगातार बढ़ रही है, जिसकी अगुवाई टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया जैसी कंपनियां कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में 50 गुना से अधिक वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार भारत अब सौर ऊर्जा महाशक्ति बन चुका है। इसने आपकी अर्थव्यवस्था को नयी गति दी है, लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ मिलकर पिछले वर्ष अकेले जीवाश्म ईंधन की खरीद पर 18 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत कराई है।’’

अगस्त 2022 में नियुक्त और 2025 में पुनर्नियुक्त स्टील संयुक्त राष्ट्र की उस एजेंसी का नेतृत्व कर रहे हैं, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन से जुड़े समझौतों और वार्ताओं का संचालन करती है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया का स्वच्छ प्रौद्योगिकी विनिर्माण केंद्र बनने का सुनहरा अवसर है। हरित इस्पात (ग्रीन स्टील) जैसे क्षेत्रों में अपनी तुलनात्मक बढ़त का लाभ उठाकर और स्वच्छ ऊर्जा में निवेश बढ़ाकर भारत वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।

स्टील ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में जलवायु सहयोग भारत को इन अवसरों का लाभ उठाने में मदद कर सकता है। भारत लंबे समय से जलवायु संबंधी बहुपक्षीय सहयोग का मजबूत साझेदार रहा है और इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जुड़े रहना पूरी तरह से आपके हित में है।’’

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, हरित अवसंरचना और उससे जुड़ी सेवाएं अगली औद्योगिक क्रांति का आधार हैं और ये भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बना सकती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में और तेज गति से आगे बढ़ना आर्थिक दृष्टि से भी पूरी तरह लाभकारी है।’’

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन में कमी भारत की विकास रणनीति का प्रमुख हिस्सा है और देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग आधा हिस्सा अब गैर जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है।

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से भारत की सौर उपकरण निर्माण क्षमता में 75 गुना वृद्धि हुई है और सौर सहित अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की बदौलत पिछले वर्ष भारत ने जीवाश्म ईंधन की खरीद पर 18 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत की।

स्टील ने कहा, ‘‘जीवाश्म ईंधन के आयात की भारी लागत ने भारत सहित सभी देशों को प्रभावित किया है। भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में तेल और गैस के आयात पर निर्भरता का मतलब है कि किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।’’

भाषा सुभाष धीरज

धीरज


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