दिल्ली के अस्पताल में रोबोट की मदद से देश की ‘पहली’ किडनी बाईपास सर्जरी

दिल्ली के अस्पताल में रोबोट की मदद से देश की ‘पहली’ किडनी बाईपास सर्जरी

दिल्ली के अस्पताल में रोबोट की मदद से देश की ‘पहली’ किडनी बाईपास सर्जरी
Modified Date: May 27, 2026 / 07:26 pm IST
Published Date: May 27, 2026 7:26 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) दिल्ली के एक अस्पताल में रोबोट की मदद से 67-वर्षीय एक महिला की ‘स्प्लीनोरीनल बाईपास सर्जरी’ की गई, जिसकी एक ही किडनी काम कर रही थी। अस्पताल ने इस सर्जरी के भारत में अपनी तरह की पहली सर्जरी होने का दावा किया है।

‘स्प्लीनोरीनल बाईपास सर्जरी’ एक संवहनी प्रक्रिया है, जिसमें प्लीहा धमनी को बाईं वृक्क धमनी से जोड़ा जाता है, ताकि किडनी में रक्त प्रवाह बहाल हो सके। यह सर्जरी मुख्य रूप से रीनोवैस्कुलर उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए या मुख्य महाधमनी में रोग होने पर किडनी की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए की जाती है।

साकेत स्थित मैक्स सुपरस्पेशियल्टी अस्पताल के मुताबिक, लखनऊ की रहने वाली जिस महिला की सर्जरी की गई, वह गंभीर ‘रीनल आर्टरी स्टेनोसिस’ (किडनी को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में सिकुड़न) से पीड़ित थी और तीन ‘एंटी-हाइपरटेंसिव’ (उच्च रक्तचाप की समस्या के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं) लेने के बावजूद उसका रक्तचाप नियंत्रित नहीं हो पा रहा था।

अस्पताल के अनुसार, महिला की दाईं किडनी पहले ही सर्जरी के जरिये निकाली जा चुकी थी और बाद में उसकी बाईं किडनी में रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में गंभीर सिकुड़न की बात सामने आई।

अस्पताल ने बताया कि धमनी में सिकुड़न के कारण महिला की बाईं किडनी में खून की आपूर्ति घट गई, जिससे उसका रक्तचाप अनियंत्रित हो गया।

अस्पताल ने कहा कि डॉक्टरों ने महिला की ‘स्प्लीनोरीनल बाईपास सर्जरी’ करने का फैसला किया, जिसके तहत उसकी प्लीहा धमनी (प्लीहा को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी) को वृक्क धमनी (ऑक्सीजन युक्त रक्त को उदर महाधमनी से सीधे किडनी तक ले जाने वाली धमनी) से जोड़ा गया, ताकि अवरुद्ध हिस्से को बाईपास करके किडनी में रक्त की आपूर्ति बहाल की जा सके।

अस्पताल के मुताबिक, यह जटिल सर्जरी अस्पताल के मूत्ररोग, किडनी प्रतिरोपण, रोबोटिक्स और यूरो-ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनंत कुमार के नेतृत्व में की गई।

अस्पताल ने कहा कि रोबोट की मदद लेने के फैसले ने चिकित्सकों की टीम को कम से कम चीर-फाड़ और अधिक सटीकता के साथ धमनियों को आपस में जोड़ने में सक्षम बनाया।

अस्पताल के अनुसार, सर्जरी के बाद महिला की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है और वह अगले दिन से न सिर्फ चलने-फिरने लगी, बल्कि उसका रक्तचाप भी उल्लेखनीय रूप से नियंत्रित रहने लगा। उसने कहा कि सर्जरी के बाद की जांच में महिला की किडनी में रक्त प्रवाह सुचारु होने की भी पुष्टि हुई है।

डॉ. कुमार ने कहा, “‘रीनल आर्टरी स्टेनोसिस’ उस समय खास तौर पर बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जब यह एकमात्र कार्यशील किडनी को प्रभावित करता है, क्योंकि खून की आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान से मरीज की किडनी को अपरिवर्तनीय नुकसान हो सकता है और उसे गंभीर अनियंत्रित उच्च रक्तचाप की समस्या सता सकती है।”

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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