उद्योगपति टाउनशिप की तरह विकसित करे कॉलोनियां तभी विस्थापित परिवार वहां बसेंगे: वन मंत्री

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उद्योगपति टाउनशिप की तरह विकसित करे कॉलोनियां तभी विस्थापित परिवार वहां बसेंगे: वन मंत्री

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 10:18 PM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 10:18 PM IST

जयपुर, 22 जून (भाषा) राजस्थान के वनमंत्री संजय शर्मा ने सोमवार को कहा कि वन वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से ही नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत एवं स्थानीय समुदायों की सहभागिता से अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

वह वन विभाग की ओर से सोमवार को सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

शर्मा कहा कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से ही नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत एवं स्थानीय समुदायों की सहभागिता से और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास एवं सतत् आजीविका संवर्धन के लिए सीएसआर के महत्व पर प्रकाश डाला।

वन मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में विस्थापित परिवारों के पैकेज में वृद्धि की गई थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में वन विभाग की ओर विस्थापितों को जो जमीन आवंटित की जा रही है, वह उबड़-खाबड़ होती है। वहां पानी, बिजली, कॉलेज और रास्तों समेत अन्य सुविधाओं का अभाव होता है, जिससे प्रभावित परिवार वहां जाने से हिचकते हैं।

उन्होंने कहा कि बिल्डर एक टाउनशिप विकसित करता है तथा वहां बसने वाले लोगों के लिए सबसे पहले स्कूल, सामुदायिक भवन, अस्पताल, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करता है। उद्योगपति भी ऐसी कॉलोनियां विकसित करें।

उन्होंने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे सीएसआर कोष के माध्यम से इन जमीनों पर सुविधायुक्त कॉलोनियां विकसित करें, ताकि विस्थापित परिवारों को बेहतर जीवन मिल सके।

उन्होंने कहा, यदि सीएसआर कोष से विस्थापितों को दी जाने वाली जमीन को टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाए तो मेरा मानना है कि विस्थापित परिवार अपनी जमीन को छोड़कर खुशी-खुशी नई जगह पर बसने के लिए तैयार हो जाएंगे।

मंत्री ने कहा, विस्थापित परिवारों के लिए सरकार आर्थिक सहयोग करेगी। राजस्थान में परिवारों के पुनर्वास के लिए इस प्रकार की योजना प्रभावी साबित हो सकती है।

वन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसमें लोग बिना नर्सरी गए ऑनलाइन पौधे मंगवा सकते हैं। इसके अलावा राजस्थान में पहली बार संभाग स्तर पर वन मेले आयोजित किए गए हैं, जिन्हें भविष्य में जिला स्तर पर भी विस्तार दिया जाएगा।

इसके बाद वन मंत्री ने रणथम्भौर बाघ अभयारण्य का भ्रमण किया।

भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को अभयारण्य में किए जा रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी विभिन्न पहलों की जानकारी दी गई। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों एवं क्षेत्र में कार्य कर रहे कर्मियों के प्रयासों की प्रशंसा की।

भाषा बाकोलिया

धीरज

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