विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर समिति के सदस्यों दी गई जानकारी

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर समिति के सदस्यों दी गई जानकारी

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर समिति के सदस्यों दी गई जानकारी
Modified Date: February 26, 2026 / 09:04 pm IST
Published Date: February 26, 2026 9:04 pm IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक पर विचार के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति ने बृहस्पतिवार को इस प्रस्तावित कानून पर सदस्यों से उनकी राय जानी और कहा कि वह उनकी चिंताओं का ध्यान रखेगी।

विधेयक में एकल उच्च शिक्षा नियामक स्थापित करने का प्रावधान है।

समिति भविष्य की बैठकों में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों जैसे सभी हितधारकों से विधेयक पर सुझाव प्राप्त करेगी।

समिति की अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा,’आज हमारी संयुक्त समिति की पहली बैठक थी। आज विधेयक सदस्यों के सामने प्रस्तुत किया गया ताकि उन्हें विधेयक की पूरी समझ हो सके।’

उनका कहना था, ‘शिक्षा और विधि मंत्रालयों के अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने हमें अच्छी जानकारी दी। उन्होंने हमें विधेयक की बारीकियां बताईं। अब सदस्यों के पास इसकी जानकारी है कि विधेयक वास्तव में क्या है।’

उन्होंने कहा कि बैठक में अपनी राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर सभी दलों का प्रतिनिधित्व था और उन्होंने विधेयक पर अपनी राय दी।

पुरंदेश्वरी ने कहा, ‘समिति उन सभी चिंताओं पर गौर करेगी जो उठाई गई हैं या जो सुझाव दिए गए हैं… हम उन सभी को ध्यान में रखेंगे।’

सूत्रों ने कहा कि विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने विधेयक पर अपना ‘विरोध’ जताते हुए कहा कि यदि कानून लागू हुआ, तो ‘संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा’ क्योंकि इसमें ‘केंद्र सरकार को बहुत अधिक शक्ति दी गई है’।

समिति में कुल 31 सदस्य हैं।

बीते 10 फरवरी को जारी लोकसभा सचिवालय अधिसूचना के अनुसार, समिति में संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल हैं और अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले प्रस्तावित कानून के प्रावधानों की जांच करेगी।

शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किया गया वीबीएसए विधेयक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा नियामक ढांचे में बदलाव का प्रावधान करता है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य कई मौजूदा नियामकों को एक एकल व्यापक निकाय से बदलना और मान्यता, वित्त पोषण और मानक-निर्धारण कार्यों को अलग करना है।

संघवाद, संस्थागत स्वायत्तता और शक्तियों के केंद्रीकरण से संबंधित मुद्दों पर विपक्षी दलों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बीच सरकार ने लोकसभा को व्यापक परामर्श के लिए विधेयक को एक संयुक्त समिति में भेजने का अपना इरादा बताया था।

भाषा हक माधव रंजन

रंजन


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