इंफोसिस का अधिकारी बनकर कंपनी से छह करोड़ रुपये की ठगी, आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज
इंफोसिस का अधिकारी बनकर कंपनी से छह करोड़ रुपये की ठगी, आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज
बेंगलुरु, तीन अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी का फर्जी अधिकारी बनकर एक कंपनी की परियोजनाओं के लिए सीएसआर कोष दिलाने का वादा कर छह करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में एक व्यक्ति और उसके साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने एक सितंबर, 2025 से 20 मार्च, 2026 के बीच इस अपराध को अंजाम दिया तथा कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद कंपनी ने यहां देवनहल्ली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।
पुलिस ने बताया कि मैसूर मर्केंटाइल कंपनी की शिकायत के बाद 30 मार्च को प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि गगन एन दीप नामक एक व्यक्ति ने इंफोसिस लिमिटेड में सीएसआर का क्षेत्रीय प्रमुख बनकर उनसे (कंपनी) संपर्क किया था।
प्राथमिकी के अनुसार, दीप ने दावा किया कि वह अवसंरचना, सुविधा संचालन, जनसंपर्क और सीएसआर मामलों के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक हर्ष जे और वैश्विक अवसंरचना और जलवायु कार्रवाई मामलों के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख नीलाद्री प्रसाद मिश्रा के साथ काम करता है।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने बेंगलुरु स्थित उनके संबद्ध ट्रस्ट, हेग्गुंजे राजीव शेट्टी चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधियों में रुचि दिखाई और इंफोसिस लिमिटेड से सीएसआर निधि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने इंफोसिस का प्रतिनिधित्व करते हुए चार से पांच व्यक्तियों की एक टीम, जिसमें चेतन और तेजस के रूप में पहचाने गए व्यक्ति शामिल थे, को ट्रस्ट की गतिविधियों का सत्यापन करने के लिए उडुपी, मंगलुरु और अन्य स्थानों पर भेजा।
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता को सीएसआर अनुदान की मंजूरी की शर्त के रूप में इंफोसिस के कथित नियमित विक्रेताओं को बयाना राशि (ईएमडी) जमा करने के लिए प्रेरित किया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि कुल छह करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें अनीता वेंचर्स के पक्ष में ‘डिमांड ड्राफ्ट’ के माध्यम से 1.75 करोड़ रुपये और एएनएस इंजीनियरिंग के पक्ष में ‘डिमांड ड्राफ्ट’ के माध्यम से 3.75 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इसके अलावा, आरोपी के निर्देशानुसार, उसके वाहन चालक के माध्यम से देवनहल्ली स्थित नंदी उपाचार होटल के पास 30 लाख रुपये की नकद राशि भी कथित तौर पर आरोपी को सौंपी गई थी।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने 21 अक्टूबर, 2025 को एक कथित स्वीकृति पत्र जारी किया, जिस पर कथित तौर पर इंफोसिस के मिश्रा के हस्ताक्षर थे और 8 जनवरी, 2026 को इंफोसिस और धर्मार्थ ट्रस्ट के बीच कर्नाटक भर में 855 से अधिक घरों के निर्माण के लिए 179 करोड़ रुपये के कुल अनुदान के साथ एक समझौता किया।
प्राथमिकी के अनुसार, 13 जनवरी, 2026 को राज्य भर में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों के निर्माण के लिए 178 करोड़ रुपये के कुल अनुदान के साथ एक और अनुदान समझौता भी किया गया था।
हालांकि, शिकायतकर्ता को बाद में संदेह हुआ कि आरोपियों द्वारा किए गए दावे झूठे थे और दस्तावेज जाली थे क्योंकि आरोपियों ने बेईमानी से उन्हें सीएसआर अनुदान के लिए ईएमडी के बहाने बड़ी रकम देने के लिए प्रेरित किया था।
प्राथमिकी के अनुसार, ‘बार-बार संपर्क करने के बावजूद न तो कोई अनुदान दिया गया और न ही राशि वापस की गई है। आरोपी अब कोई जवाब नहीं दे रहा है और जानबूझकर बातचीत से बच रहा है।’
पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 316(2) (आपराधिक विश्वासघात), धारा 319(2) (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), धारा 336(3) (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और संदिग्धों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भाषा
राखी नरेश
नरेश

Facebook


