गांदरबल में 1998 के कश्मीरी पंडित हत्याकांड की फिर शुरू हुई जांच

गांदरबल में 1998 के कश्मीरी पंडित हत्याकांड की फिर शुरू हुई जांच

गांदरबल में 1998 के कश्मीरी पंडित हत्याकांड की फिर शुरू हुई जांच
Modified Date: August 25, 2026 / 05:15 pm IST
Published Date: August 25, 2026 5:15 pm IST

श्रीनगर, 25 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर में गांदरबल जिले के वंधामा में वर्ष 1998 में 23 कश्मीरी पंडितों की नृशंस हत्या किए जाने के मामले की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने फिर से जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

वंधामा नरसंहार मामले की जांच दोबारा शुरू करने का यह कदम घाटी में कश्मीरी पंडितों की हत्याओं से जुड़े कई पुराने मामलों की एसआईए द्वारा नए सिरे से की जा रही जांच की कड़ी में उठाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस जांच का उद्देश्य वंधामा हत्याकांड में शामिल आतंकियों तथा उनके मददगारों की पहचान करना और उनकी भूमिका स्थापित करना है।

सेना की वर्दी में आए आतंकियों का एक समूह 25 जनवरी 1998 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले स्थित वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों के घरों में घुसा था।

आतंकियों ने पहले ग्रामीणों से बातचीत कर पंडित परिवारों को एक स्थान पर एकत्र होने को कहा और फिर उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस हमले में नौ महिलाओं और चार बच्चों समेत 23 कश्मीरी पंडितों की मौत हो गई थी।

मारे गए लोग उन चार परिवारों से ताल्लुक रखते थे, जिन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद पनपने के बाद भी घाटी से पलायन नहीं किया था और वहीं रुक गए थे।

इस संबंध में गांदरबल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन लगभग तीन दशकों से यह मामला अनसुलझा ही रहा। पुलिस के अनुसार, इस नरसंहार को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयाबा (एलईटी) से जुड़े आतंकवादियों ने अंजाम दिया था।

अधिकारियों ने कहा कि जांच को फिर से शुरू करने का मुख्य उद्देश्य उन सभी पुराने आतंकी मामलों की दोबारा पड़ताल करना है, जो अब तक अनसुलझे रहे हैं, ताकि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जा सके।

वंधामा नरसंहार के अलावा, एसआईए ने वर्ष 1989 में हुई टीका लाल टपलू और न्यायमूर्ति नीलकंठ गंजू की हत्या की भी फिर से जांच शुरू की है।

प्रमुख वकील और भारतीय जनता पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के तत्कालीन उपाध्यक्ष टीका लाल टपलू की सितंबर 1989 में श्रीनगर में उनके आवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के संस्थापक मकबूल भट को फांसी की सजा सुनाने वाले न्यायमूर्ति गंजू की चार नवंबर 1989 को श्रीनगर में हरि सिंह मार्ग पर संदिग्ध आतंकियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों मामलों की जांच भी दोबारा खोल दी गई है और इसके तहत एसआईए ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर छापेमारी की है।

भाषा

सुमित नेत्रपाल

नेत्रपाल


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