अहमदाबाद, सात अप्रैल (भाषा) गुजरात के अहमदाबाद में ढाई महीने की एक शिशु का शव मंगलवार को शहर पुलिस ने कब्र से बाहर निकाला।
यह कार्रवाई उस घटना के कुछ दिन बाद की गई, जिसमें बच्ची और उसकी तीन वर्षीय बहन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनके माता-पिता ने डोसा बनाने की पहले से तैयार सामग्री के कारण खाद्य विषाक्तता का आरोप लगाया है।
चांदखेड़ा पुलिस थाने के निरीक्षक जे.के. मकवाना ने बताया कि बच्ची के शव को कार्यपालक मजिस्ट्रेट और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के अधिकारी की मौजूदगी में कब्र से बाहर निकाला गया तथा मौत के सटीक कारण का पता लगाने के लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम हेतु सिविल अस्पताल भेजा गया है।
बच्ची को चांदखेड़ा स्थित श्मशान घाट में दफनाया गया था।
बच्ची की मृत्यु चार अप्रैल को हुई थी, जबकि उसकी तीन वर्षीय बड़ी बहन की मौत पांच अप्रैल को हुई।
उनके माता-पिता विपुल प्रजापति और भावना प्रजापति, जो वर्तमान में एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्हें संदेह है कि बच्चियों की मौत एक अप्रैल को एक स्थानीय डेयरी से खरीदी गयी सामग्री से बने डोसे खाने से जुड़ी हैं।
उन्होंने बताया कि इस सामग्री का इस्तेमाल एक और दो अप्रैल को डोसे बनाने में किया गया था।
परिवार के सभी सदस्य बीमार पड़ गए, लेकिन शुरुआती घरेलू उपचार के बाद स्वास्थ्य में कुछ सुधार महसूस होने पर वे तुरंत अस्पताल नहीं गए।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब चारों की हालत बिगड़ने लगी, तब उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मकवाना ने बताया कि दंपति ने छोटी बेटी की मौत की सूचना दिए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पांच अप्रैल को बड़ी बेटी को नींद से उठने के बाद चक्कर आया और वह गिर पड़ी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अधिकारी ने बताया कि तीन वर्षीय बच्ची का पोस्टमार्टम किया गया है और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) तथा खाद्य एवं औषधि विभाग की टीमों ने घर और उस डेयरी से खाद्य नमूने एकत्र किए हैं, जहां से सामग्री खरीदी गयी थी।
अधिकारी ने बताया कि डेयरी मालिक विपुल पटेल से भी पूछताछ की जा रही है।
डेयरी मालिक विपुल पटेल ने सामग्री और मौतों के बीच किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया।
उन्होंने कहा, ‘मैं नियमित रूप से लगभग 100-125 किलो सामग्री बेचता हूं। कम से कम कुछ शिकायतें तो मिलनी ही चाहिए थीं।’
भाषा
राखी माधव
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