हाजी इकबाल के खिलाफ रीयल एस्टेट धोखाधड़ी मामले की जांच एसटीएफ से एसएफआईओ को स्थानांतरित

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हाजी इकबाल के खिलाफ रीयल एस्टेट धोखाधड़ी मामले की जांच एसटीएफ से एसएफआईओ को स्थानांतरित

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 10:31 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 10:31 PM IST

प्रयागराज, 17 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 6.33 करोड़ रुपये की कथित रीयल एस्टेट धोखाधड़ी के मामले में पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) हाजी इकबाल उर्फ बाला के खिलाफ चल रही जांच उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को स्थानांतरित कर दी है।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की पीठ ने प्राथमिकी रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा करने से शिकायतकर्ता के पास कोई कानूनी उपाय नहीं बचेगा।

जांच स्थानांतरित करते हुए अदालत ने कहा कि एसएफआईओ पहले ही इकबाल और शेल कंपनियों के नेटवर्क से जुड़े एक व्यापक धोखाधड़ी मामले की जांच कर चुका है तथा वर्तमान प्राथमिकी और इसमें नामित कंपनी भी उसी नेटवर्क का हिस्सा हैं।

अदालत ने एक निवेशक की शिकायत से संबंधित प्राथमिकी रद्द करने से इनकार करते हुए बृहस्पतिवार को इकबाल की ओर से दाखिल रिट याचिका का निस्तारण कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच एसएफआईओ को सौंप दी जाए, ताकि एक ही एजेंसी द्वारा विशेष और व्यापक जांच सुनिश्चित हो सके तथा अलग-अलग जांच से बचा जा सके।

पीठ ने कहा कि प्राथमिकी रद्द करना एक असाधारण उपाय है और यदि किसी शिकायतकर्ता के व्यक्तिगत लेनदेन की एसएफआईओ द्वारा जांच नहीं की गई है तो उसकी शिकायत की जांच आवश्यक है।

अदालत ने कहा कि यदि एसटीएफ को उसी कॉरपोरेट नेटवर्क से जुड़े मामले में समानांतर जांच जारी रखने की अनुमति दी जाती है, जिसकी जांच पहले ही एसएफआईओ कर चुका है और मामला दिल्ली की एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित है, तो धोखाधड़ी की एक ही और अविभाज्य योजना की जांच अलग-अलग हिस्सों में बंट जाएगी।

नावेद अहमद ने वर्ष 2023 में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा में एक रीयल एस्टेट भूखंड विकसित करने के लिए दिसंबर 2013 से मार्च 2014 के बीच एनचैंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को 6.33 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए थे।

हालांकि, इसके बाद भूखंड पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया। कंपनी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को देय किस्तों का भुगतान भी नहीं कर सकी। इसके बाद प्राधिकरण ने अगस्त 2022 में करीब 29 करोड़ रुपये के बकाये का हवाला देते हुए भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया था, जबकि कंपनी ने करीब 4.5 करोड़ रुपये ही जमा किए थे।

इस बीच, वर्ष 2015 में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर याचिकाकर्ता से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और शेल कंपनियों के संचालन पर चिंता जताई गई थी।

उच्चतम न्यायालय ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को हाजी इकबाल से जुड़े मामलों की जांच एसएफआईओ से कराने का निर्देश दिया था। जांच पूरी करने के बाद एसएफआईओ ने नई दिल्ली की द्वारका अदालत के विशेष न्यायाधीश के समक्ष शिकायत दाखिल की।

एसएफआईओ की शिकायत में हाजी इकबाल को पहला आरोपी बनाया गया है और उन्हें समूह के संचालन का कथित रूप से मुख्य नियंत्रक बताया गया है।

एसएफआईओ के अनुसार, जांच के दायरे में आई 84 आरोपी इकाइयों के माध्यम से 610.30 करोड़ रुपये की राशि व्यवस्थित तरीके से प्रवाहित की गई। ये सभी शेल कंपनियां थीं, जिनमें भूमि अधिग्रहण, रीयल एस्टेट और चीनी मिलों के लिए कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं थी।

एसएफआईओ ने आरोप लगाया कि यह राशि हाजी इकबाल के अब्दुल वहीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तक पहुंचाई गई।

भाषा

सं, राजेंद्र रवि कांत