छात्रों की बेरहमी से पिटाई होते देखना बेहद पीड़ादायक: अभिजीत दीपके की मां

छात्रों की बेरहमी से पिटाई होते देखना बेहद पीड़ादायक: अभिजीत दीपके की मां

छात्रों की बेरहमी से पिटाई होते देखना बेहद पीड़ादायक: अभिजीत दीपके की मां
Modified Date: July 23, 2026 / 02:37 pm IST
Published Date: July 23, 2026 2:37 pm IST

छत्रपति संभाजीनगर, 23 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने नयी दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि छात्रों को इस तरह पिटते देखना बेहद पीड़ादायक है।

उन्होंने सरकार से आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनने और हिरासत में लिए गए लोगों को जल्द रिहा करने की अपील की।

नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सोमवार को संसद की ओर मार्च कर रहे कॉजपा के हजारों प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां चलाई थीं।

कॉजपा ने आरोप लगाया है कि उसके ‘‘संसद चलो’’ मार्च के दौरान सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्र घायल हुए।

अनीता दीपके ने बुधवार को छत्रपति संभाजीनगर में मराठी समाचार चैनल ‘जी 24 तास’ से कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुने और उन्हें जल्द से जल्द रिहा करे। छात्रों की बेरहमी से पिटाई देखकर मुझे चिंता हो रही है। यह सब देखकर मैं भावुक हो गई हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों को जानवरों की तरह निर्ममतापूर्वक पीटते देखना बेहद पीड़ादायक है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों ने कुछ भी गलत नहीं किया था, फिर भी उनकी पिटाई की गई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि आगे छात्रों के साथ क्या होगा।

अनीता दीपके ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे समेत कई नेताओं के प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचने से उन्हें कुछ राहत मिली।

उन्होंने सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर टालमटोल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार सिर्फ समय निकाल रही है। जनता के समर्थन से चुनाव जीतने के बाद अब वह उसी जनता की बात नहीं सुन रही है। छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के उग्र होने के लिए सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, ‘‘पहली गलती सरकार ने तब की, जब उसने एक महीने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियां चलवाईं। यदि उनकी मांगें पहले ही मान ली जातीं, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।’’

भाषा

मनीषा देवेंद्र

देवेंद्र


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